अयोध्या राम जन्मभूमि मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ये सिर्फ जमीन का मसला नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ा है

अयोध्या राम जन्मभूमि मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ये सिर्फ जमीन का मसला नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ा है

NEW DELHI : राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद को मध्यस्थता के जरिये सुलझाया जा सकता है या नहीं, इस पर उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को संबंधित पक्षों को सुनने के बाद कहा कि इस पर आदेश बाद में सुनाया जायेगा।प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में संविधान पीठ ने पक्षकारों की दलीलें सुनीं।

सुनवाई के दौरान जस्टिस एसए बोबडे ने कहा, यह केवल जमीन विवाद नहीं बल्कि भावनाओं, धर्म और विश्वास से जुड़ा मामला है। उन्होंने कहा कि इसमें मध्यस्थ नहीं बल्कि मध्यस्थों का एक पैनल होना चाहिए। जस्टिस भूषण ने कहा कि अगर पब्लिक नोटिस दिया जाएगा तो मामला कई सालों तक चलेगा। वहीं जो मध्यस्थता होगी वो कोर्ट की निगरानी में होगी।

अब मध्यस्थों पर दारोमदार

हिंदू महासभा ने कहा कि वह मध्यस्थता को तैयार है। महासभा ने इसके लिए पूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा समेत तीन जजों के नाम सुप्रीम कोर्ट को दिए हैं। उनके अलावा पूर्व सीजेआई जस्टिस जे.एस खेहर और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस ए.के पटनायक के नाम दिए हैं। निर्मोही अखाड़ा ने मध्यस्थता के लिए जस्टिस कूरियन जोसेफ, ए.के पटनायक और जीएस सिंघवी का नाम दिया है।

बता दें कि अयोध्या विवाद पर पहले भी कई बार मध्यस्थता की कोशिशें हो चुकी हैं, लेकिन हर बार नतीजा नहीं निकला। इस बार सुप्रीम कोर्ट ने कमान संभाली है, तो उम्मीद जताई जा रही है कि अयोध्या का रास्ता मध्यस्थता के जरिए निकलेगा।

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