बाढ़ को लेकर सुशासन के व्यवस्था की खुली पोल, इलाज के अभाव में नवजात बच्ची की गई जान

बाढ़ को लेकर सुशासन के व्यवस्था की खुली पोल, इलाज के अभाव में नवजात बच्ची की गई जान

Motihari : बाढ़ को लेकर सरकार द्वारा राहत और बचाव के बड़े-बड़े दावे किये जा रहे है, लेकिन इस दावे में कितनी सच्चाई है इसकी पोल आज पूर्वी चंपारण जिले से आई एक घटना से खुल गई है। 

जिले के 27 में 17 प्रखंड बाढ़ से तबाह है। सुशासन की सरकार व प्रशासन बाढ़ पीड़ितों को हर सुविधा मुहैया कराने का दावा कर रही है, लेकिन आज उसकी इस सुविधा ने ही एक नवजात बच्ची की जान ले ली। 

दरअसल बंजरिया में एक नवजात बच्ची को अस्पताल ले जाने के दौरान बीच मझधार में आपदा वोट का तेल खत्म गया। जिसकी वजह से वोट समय पर किनारे नहीं पहुंच सका।  जिसकी वजह से बीमार नवजात को समय रहते अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका और इलाज के अभाव में बच्ची की मौत हो गई। 

इधर इस मामले पर बंजरिया बीडीओ सह प्रभारी सीओ की ओर से अलग दलील दी गई। उन्होंने कहा कि वोट का तेल खत्म नहीं हुआ था, बल्कि वोट में खराबी आ गई थी। जिसकी वजह से बच्ची को अस्पताल पहुंचाने में देर हुई।  

स्थानीय लोगों ने बताया कि बंजरिया प्रखंड के मेराज खान के पुत्री सहबुन खातून को बुधवार की रात्रि 2 बजे घर पर ही प्रसव हुआ। आज सुबह 6 बजे बच्ची की तबियत खराब होने लगी। जिसके बाद परिजनों ने अस्पताल ले जाने के लिए बीडीओ सह प्रभारी सीओ से फोन कर वोट उपलब्ध कराने की गुहार लगाई।

परिजनों ने बताया कि सूचना के दो घंटे बाद सिसवनिया गांव आपदा विभाग से वोट  पहुंचा। वोट से बीमार बच्चा को लेकर अस्पताल चले, लेकिन लगभग एक किलोमीटर बीच धार में जाने के बाद वोट का तेल खत्म हो गया। .नाविक के अथक प्रयाश से एक गांव के पास वोट को साइड कर लगाया गया।

बीमार बच्चा व परिजनों की बेचैनी देख ग्रामीण बाइक से पेट्रॉल निकालकर दिए। पेट्रॉल डालने के बाद वोट ही खराब हो गया। तबतक नवजात बच्ची ने दम तोड़ दिया। 

मोतिहारी से हिमांशु की रिपोर्ट

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