प्रशासन की मदद से ऐन समय पर बाल विवाह रोकने में सफल हुआ चाइल्डलाइन

प्रशासन की मदद से ऐन समय पर बाल विवाह रोकने में सफल हुआ चाइल्डलाइन

किशनगंज। चाइल्डलाइन ने पुलिस और प्रशासन के सहयोग से बाल विवाह की घटना को रोकने में कामयाब हुई है। चाइल्डलाइन की टीम शादी के ठीक पहले मौके पर पहुंच गई और कानूनन अवैध घोषित शादी को रोक दिया। दोनों बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र की जांच से भी यह स्पष्ट हो गया कि वह अभी नाबालिग हैं। 

मामले में बताया गया कि प्रखंड के ट्यूसा पंचायत में एक नाबालिग बच्चों की शादी होने कि सूचना किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा चाइल्डलाइन किशनगंज को प्राप्त हुई।  चाइल्डलाइन टीम सदस्य मुजाहिद आलम ने तुरंत मामले को अनुमंडल पदाधिकारी सह बाल विवाह निषेध पदाधिकारी शहनवाज अहमद नियाजी और प्रखंड विकास पदाधिकारी मोहम्मद मेराज आलम को संज्ञान में दिया। जिसमें प्रखंड विकास पदाधिकारी मोहम्मद मेराज आलम ने मामले को संज्ञान में लेकर अंचलाधिकारी को चाइल्डलाइन टीम के साथ तुरंत उक्त बाल विवाह को रोकने की बात कही। चाइल्डलाइन किशनगंज की गठित संयुक्त टीम द्वारा सूचना स्थल पर पहुंचकर बाल विवाह होने से रोक लिया।

 ट्यूसा पंचायत में हो रहे बाल विवाह के परिजनों को चाइल्डलाइन किशनगंज की टीम द्वारा बाल विवाह के बारे में विस्तार से जानकारी दिया और कानूनी प्रक्रिया के बारे में भी बताया। बाल विवाह स्थल पर स्थानीय जन प्रतिनिधियों और मुख्या प्रतिनिधि सहित स्थानीय गणमान्य लोगों की मौजूदगी में होने वाले बाल विवाह को रोका गया। वही अंचलाधिकारी ने बताया कि बचपन की शादी बच्चों के लिए तबाही का सबब है। ये उनके मौलिक अधिकारों का भी हनन है। समय से पहले होने वाली शादियों से कुप्रभाव को देखते हुए सरकार ने बाल विवाह पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया। इसी के तहत होने वाले बाल विवाह को रोका गया और बाल विवाह कराना कानूनन जुल्म है। 

उन्होंने बताया कि बच्ची के पिता जानकारी के अभाव में ये कदम उठाया था। और अपनी गलती स्वीकार किया और 18 वर्ष पूरा होने के बाद ही करने का एक शपथ पत्र लिखकर दिया। इससे पूर्व भी ट्यूसा पंचायत में कई बाल विवाह को रोका गया था। तो वही चाइल्डलाइन टीम सदस्य मुजाहिद आलम ने लोगो को जानकारी देते हुए बताया की बाल विवाह किसी बच्चे को अच्छे स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा के अधिकार से वंचित करता है। ऐसा माना जाता है कि कम उम्र में विवाह के कारण लड़कियों को हिंसा, दुर्व्यवहार और उत्पीड़न का अधिक सामना करना पड़ता है। कम उम्र में विवाह का लड़के और लड़कियों दोनों पर शारीरिक, बौद्धिक, मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक प्रभाव पड़ता है, शिक्षा के अवसर कम हो जाते हैं और व्यक्तित्व का विकास सही ढंग से नही हो पाता है। बाल विवाह स्थल पर अंचलाधिकारी किशनगंज, चाइल्डलाइन कॉलेब टीम मुजाहिद आलम, रोशनी प्रवीण, ट्यूसा पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि मोहम्मद मैनुद्दीन, स्थानीय ग्रामीण मौजूद थे।

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