सीमांचल में रोजगार का जरिया बन चुके जुगाड़ वाहनों के चलाने पर लगी रोक, विरोध में उतरे माले विधायक ने कहा - मोटर कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए जारी हुआ आदेश

सीमांचल में रोजगार का जरिया बन चुके जुगाड़ वाहनों के चलाने पर लगी रोक, विरोध में उतरे माले विधायक ने कहा - मोटर कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए जारी हुआ आदेश

KATIHAR : बिहार के बंगाल से सटे सीमांचल के जिलों में जुगाड़ गाड़ी यातायत एक बड़ा साधन है, खासकर सुदूर इलाके में लकड़ी के बने इस गाड़ी में मोटर लगाकर जुगाड़ तकनीक से बनाए गए ऐसी गाड़ी बेहद उपयोगी है, सुदूर इलाके से मरीज को इलाज के लिए लाना हो या माल ढुलाई और सवारी ढोने में भी जुगाड़ गाड़ी बेहद उपयोगी है। लेकिन अब इन गाड़ियों को चलाने पर जिला परिवहन विभाग की तरफ से अवैध बताते हुए रोक लगा दी गई है। डीटीओ के इस आदेश के बाद इसका विरोध भी शुरू हो गया है। बलरामपुर से माले विधायक महबूब आलम ने इसे डीटीओ की मनमानी करार दिया है। उन्होंने कहा कि डीटीओ वाहन कंपनियों के लिए काम कर रहे हैं। जो कही से भी सही करार नहीं दिया जा सकता है। 

महबूब आलम ने बताया कि सीमांचल में एक लाख लोग इन फटफटिया गाड़ी को चलाते हैं। जिनसे एक बड़ी आबादी का पेट भरता है। यह वैसे लोग हैं जो बेरोजगारी में अपराध की तरफ न जाकर अपने लिए रोजगार के विकल्प के रूप में अपनाया है। मगर इन गाड़ियों की लाइसेंस से जुड़ी कुछ कारणों को लेकर फिलहाल कटिहार में प्रशासन के तरफ से इन गाड़ियों पर रोक लगा दिया गया है जिससे बड़ी संख्या में जुगाड़ गाड़ी चालक बेरोजगार हो गए हैं। उन्होंने कहा कि देश में रोजगार के साधन कम हो रहे हैं, वैसे में युवा अपने लिए रोजगार की व्यवस्था कर रहे हैं तो प्रशासन उन्हें सम्मानित करने की जगह बेवजह परेशान कर रही है।


कंपनी की सेवा कर रहे हैं डीटीओ

माले विधायक ने कहा कि जिले के डीटीओ कानून का नाम लेकर वाहन कंपनियों की सेवा कर रहे हैं। फटफटिया वाहनों के कारण इन वाहन कंपनियों को नुकसान हो रहा है। जिसके कारण साजिश के तहत इन गाड़ियों को बंद कराने का आदेश जारी किया गया है, ताकि वह कंपनी की गाड़ी खरीदने के लिए लोगों को खरीदने के लिए मजबूर कर सकें। माले विधायक ने कहा कि मैनें इस संबंध में जिले के डीएम से बात की है, उन्होंने कहा है कि तत्काल इस रोक को हटाने का आदेश जारी कर रहे हैं। इस दौरान महबूब आलम ने कहा कि वह इस संबंध में सीएम से भी बात करेंगे और पूरे बिहार में जुगाड़ गाड़ी को मान्यता देने की मांग करेंगे।


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