बोधगया में अतंरराष्ट्रीय त्रिपिटक पूजा की हुई शुरुआत, भारत समेत 13 देशों की निकली शोभा यात्रा

बोधगया में अतंरराष्ट्रीय त्रिपिटक पूजा की हुई शुरुआत, भारत समेत 13 देशों की निकली शोभा यात्रा

GAYA : बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर में 14वीं अंतरराष्ट्रीय पूजा की शुरुआत विश्वशांति यात्रा के साथ शुरु हुई। कमिश्नर टीएन बिंधेश्वरी, बीटीएमसी सचिव एन दोरजी व वरीय बौद्ध गुरुओं ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर समारोह का उद्घाटन किया। 12 दिसम्बर को विशेष अनुष्ठान के साथ पूजा समाप्त होगी। पूजा के समापन के बाद 13 दिसंबर को सभी बौद्ध भिक्षु जेठियन से पद यात्रा करते हुए वेणुवन राजगीर जायेंगे। 

इस मौके पर भारत, थाईलैंड, वियतनाम, श्रीलंका, बांगलादेश, नेपाल, म्यांमार, कम्बोडिया, लाओस, इंडोनेशिया आदि देशों के भिक्षुओं तथा भिक्षुणियों द्वारा अद्भुत शोभा यात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा रॉयल थाई बौद्ध मठ से निकली जो कालचक्र मैदान तक पहुंची और महाबोधि मंदिर पहुंच कर मंत्रोच्चार के साथ शोभा यात्रा सम्पन्न हुई। 

दस दिवसीय त्रिपिटक पूजा में शामिल होने वाले 13 देशों के श्रद्धालुओं के अलग-अलग तंबू बनाए गए हैं। इस पूजा में भगवान बुद्ध के उपदेशों की बात होती है।पालि त्रिपिटक भगवान बुद्ध के उपदेशों का संग्रह है। इस विषय के आधार पर तीन भागो-सूत्त पिटक, विनय पिटक व अभिधम्म पिटक में विभाजित किया गया है। बोधगया में त्रिपिटक को संरक्षित करने के लिए पिछले 13 वर्षों से पूजा का आयोजन किया जा रहा है।अबतक सूत्त पिटक के दीघनिकाय, मज्झिम निकाय, अंगुत्तर निकाय व संयुक्त निकाय, खुद्दक निकाय के तहत खुद्दक पाठ, धम्मपद, उदान, इतिवुत्तक, सूत्तनिपात, विमानवत्थु व पेतवत्थु का पाठ हो चुका है। 

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