बेटी बचाओ देश बचाओ ,नारी सशक्तिकरण विषय का चरित्र चित्रण

बेटी बचाओ देश बचाओ ,नारी सशक्तिकरण विषय का  चरित्र चित्रण

लखीसराय:बेटी है तो कल है। सीता सावित्री और प्रकृति ही नहीं, अपितु गौ भूमि वृक्ष नदी आदि की वंदना करने वाले हम भारत वासियो को माँ बहन दोस्त पत्नी और प्रेमिका सब चाहिए तो आखिर बेटी क्यों नहीं? नारी ही सृष्टि का आधार है। देवी देवताओं महामानवों को भी धरती और समाज के उद्धार से पूर्व मां स्वरूपा एक नारी के वात्सल्य से विभूषित होना पड़ता है। बेटी की महत्ता, कन्या भ्रूण की सुरक्षा और नारी सशक्तिकरण विषय को चरित्र चित्रण करने के लिए शनिवार की देर शाम प्लस टू उवि बड़हिया के विशाल हॉल में गणेश गौरव द्वारा रचित और निर्देशित देवियां नाटक का मंचन किया गया। 

उवि बड़हिया और आकाशगंगा रंग चौपाल एसोसिएशन बरौनी के सौजन्य से आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन नवोदय विद्यालय के प्राचार्य रविशंकर प्रसाद, जदयू के पूर्व विधान पार्षद भूमिपाल राय, बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के जिला सचिव संजीव कुमार, एनआरआई अजय सिंह, पार्षद अमित कुमार और उवि के प्राचार्य ब्रम्हचारी पांडेय के द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। मंच के संचालक और उद्घोषक के रूप में जीडी कॉलेज बेगूसराय के प्रो डॉ कुंदन कुमार उपस्थिति अति सराहनीय रही। समारोह में पहुंचे मुख्य अतिथियों को आयोजक मंडल द्वारा पौधे भेंट किये जाने के साथ ही नाटक मंचन का आगाज हुआ। गणेश वंदना से प्रारंभ होकर लगभग डेढ़ घण्टे तक चले मंचन के बीच उवि बड़हिया और रंग चौपाल के चयनित छात्र छात्राओं व कलाकारों में शामिल ईशा, साक्षी, अंकिता, शालू, पम्मी, सुप्रिया, मनीष, रूपेश, अंकित, राहुल समेत अन्य सह कलाकारों के द्वारा भाव विह्वल कर देने वाली जीवंत पटकथा की प्रस्तुति दी गई।

 इस दौरान आत्मा को झकझोर देने वाले संदेशों के साथ सभी पात्रों के द्वारा भ्रूण हत्या, बलात्कार, दहेज उत्पीड़न जैसे ज्वलंत मुद्दों पर कठोराघात किया गया। प्रति पल रंग बदलते रंगीन कृत्रिम प्रकाशों के बीच किये जा रहे अभिनय के दौरान दर्शक दीर्घा में निस्तब्धता बनी रही। अहिल्या मरियम जीसस यीशु हीर रांझा और सोनी महिवाल की चर्चाओं के बीच नारी के पात्र में ढली कलाकारों ने कहा कि पिता के घर की लाडली को भ्रम में रखकर कहा जाता है कि बेटी एक नहीं बल्कि दो दो घर की राजकुमारी होती है। परन्तु सच तो यही है कि बेटी का कोई घर ही नहीं होता। बाबुल के घर उसे पराये की अमानत तो ससुराल में बेटी को दूसरे घर से आई बताया जाता है। समानता के अधिकार की बड़ी बड़ी बातें करने वाले समाज में आखिर बेटी का कोई घर क्यों नहीं होता? 

संतान सुहाग और परिवार की जिम्मेदारी में बंधी नारी का सम्पूर्ण जीवन ही स्वयं के विपरीत अन्य के लिए ही होती है। सभी कलाकारों द्वारा एक स्वर से उधृत यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमन्ते तत्र देवता और संगीत शिक्षक नरेश कुमार के अभिवादन से संपन्न हुए कार्यक्रम के दौरान बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के उपाध्यक्ष अरविंद कुमार भारती, उवि बालगुदर के पूर्व प्राचार्य शशि कुमार सिंह, समाजसेवी निरंजन कुमार सिंह, राजेश कुमार, अशोक पांडेय, विपिन कुमार, घनश्याम कुमार, नरेश कुमार, सुधीर कुमार सिंह, रामप्रवेश कुमार, गणेश प्रसाद सिंह, राजेश कुमार मंटु, रामजी सिंह, रामप्रवेश सिंह, उमाशंकर कुमार, अशोक कुमार, पीयूष कुमार झा, राहुल कुमार, पिन्टू कुमार, कृपाल गौरव, शिवशंकर कुमार, रौशन अनुराग, नीलेश कुमार सहित दर्जनों की संख्या में समाज के प्रबुद्धजनों गुणीजनों और शिक्षा व कलाप्रेमियों की उपस्थिति बनी रही।

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