सावधान : देश के इन चार राज्यों के 21 शहरों में आधे से ज्यादा कोरोना संक्रमित मरीज, कैसे बचेगा बाकी प्रदेश

सावधान : देश के इन चार राज्यों के 21 शहरों में आधे से ज्यादा कोरोना संक्रमित मरीज, कैसे बचेगा बाकी प्रदेश

News4nation desk : कोरोना के कहर से पूरी दुनिया कराह रही है। कोरोना का संक्रमण की रफ्तार इतनी तेज है कि वह सिर्फ 2 महीने में ही 261 गुना बढ़ चुका है। भारत में  जहां 30 जनवरी को कोरोना वायरस का पहला केस केरल में मिला था वहीं 49 दिनों में यह खतरनाक बीमारी 19 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेशों को अपनी गिरफ्त में ले चुका है। 

कोरोना के रफ्तार से परेशान प्रधानमंत्री मोदी ने आज जनता कर्फ्यू मैं साथ देने का आग्रह किया था। इसका नजारा भी देखने को मिल रहा है। लेकिन बड़ा सवाल है कि कोरोना के रफ्तार पर ब्रेक लगेगा तो कैसे लगेगा। 

जिन शहरों में 55% कोरोना के मरीज हैं उन शहरों से दूसरे राज्यों की तरफ बढ़ रहे लोगों को कैसे रोका जाए।इसे देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने अपील की है कि जो जहां है वहीं ठहर जाएं तो कोरोना खुद-ब-खुद भाग जाएगा।

4 राज्यों के 21 शहरों में 55 प्रतिशत कोरोना मरीज

30 जनवरी को देश में पहला कोरोना का मरीज मिलने के बाद सिर्फ 49 दिनों के अंदर कोरोना का संक्रमण देश के 19 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में पहुंच चुका है। लेकिन जो सबसे बड़ी बात निकल कर के सामने आ रही है वह यह है कि सिर्फ चार राज्यों में 55% कोरोना के मरीज हैं। 

बता दें कि महाराष्ट्र, केरल, यूपी और दिल्ली में कोरोना पीड़ित के 181 मामले मिले हैं। जो अभी तक मिले कोरोना के मरीज का 55% हिस्सा है। 

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में शनिवार को कोरोना संक्रमित 11 नए लोग मिले इनमें 10 मुंबई और एक पुणे का  है।इसी के साथ यहां के 8 शहरों में कुल 64 मरीज हो गए। वहीं यूपी के 6 शहरों में 43 कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं। जिसमें सबसे ज्यादा नोएडा में मिले हैं।

दिल्ली में 26 कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। यानी महाराष्ट्र केरल दिल्ली और उत्तर प्रदेश के शहरों में है देश के 55% को रोना के मरीज है। लेकिन अब अगर हम नहीं संभले तो स्थिति और बिगड़ सकती है। क्योंकि इन शहरों से काफी संख्या में लोग अपने घरों की तरफ जा रहे हैं। इसमें ज्यादातर बिहार आ रहे हैं। 

हालांकि सरकार ने दावा किया है कि जो भी लोग बिहार आ रहे हैं उनका स्क्रीनिंग किया जा रहा है। उसके बाद ही उन्हें घर भेजा जाएगा। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो आने वाले समय में बिहार के लिए बहुत ही बड़ा संकट सामने आने वाला है।

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