भैंस पर चढ़कर चुनाव प्रचार कर रहे थे नेताजी , हो गया एफआईआर

भैंस पर चढ़कर चुनाव प्रचार कर रहे थे नेताजी , हो गया एफआईआर

GAYA : बिहार में चुनाव है. चुनाव में अपनी मजबूती दिखाने के लिए और जनता को आकर्षित करने के लिए उम्मीदवार अपने-अपने तरीके से चुनाव प्रचार कर रहे है. प्रत्याशी अपने वोटरों को लुभाने के लिए कोई भी कसर नहीं छोड़ रहे हैं। ऐसे में कुछ गलतियां भी कर दे रहे है। कुछ ऐसा ही हुआ रविवार को। गया के गांधी मैदान गेट के समीप से राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के गया शहरी विधान सभा क्षेत्र के प्रत्याशी परवेज मंसूरी भैंस पर सवार होकर जन संपर्क अभियान को निकले। 

मंसूरी के इस अंदाज को देख कर भीड़ भी जुटने लगी। मंसूरी ने कहा कि शहर में लगातार प्रदूषण बढ़ते जा रहा है। इसलिए हम भैंस पर चढ़े हैं, ताकि प्रदूषण न फैले। परवेज मंसूरी की सोच को समर्थन भी मिलने लगा, लेकिन सिविल लाइन के थानेदार ने नियम का ऐसा पाठ-पढ़ाया कि नेताजी को महंगा पड़ गया और उनके खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज हो गई।  जी हां, पशु क्रूरता अधिनियम और सोशल डिस्टेंसिंग की अनदेखी के कारण राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के गया शहरी विधानसभा के उम्मीदवार परवेज मंसूरी पर एफआईआर हो गई है। गांधी मैदान से स्वराजपुरी रोड पर पहुँचे नेताजी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और आईपीसी की धारा 269 और धारा 270 के तहत पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और सोशल डिस्टेंशिंग की अवहेलना के नाम पर उन्हें गिरफ्तार कर बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया।

परवेज मंसूरी का कहना है कि वह राजनेताओं को आईना दिखाना चाहते थे क्योंकि गया बिहार का सबसे गंदा शहर है। अगर वह विधानसभा चुनाव जीत गए तो गया प्रदूषण मुक्त शहर होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि एनडीए के उम्मीदवार प्रेम कुमार 30 साल से विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार मोहन श्रीवास्तव 15 साल के लिए गया के डिप्टी मेयर हैं, लेकिन वे गया में विकास प्रदान करने में विफल रहे।

वहीं गया एसएसपी राजीव मिश्रा ने कहा कि उनके और उनके समर्थकों के खिलाफ सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई। यह पशु अधिनियम के लिए क्रूरता की रोकथाम का उल्लंघन था। पुलिस जांच करेगी और उसके अनुसार आगे बढ़ेगी। 

गया से मनोज की रिपोर्ट

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