अब भोजपुरी में पढ़िए राम चरित मानस, लॉकडाउन नें इस शिक्षक ने दिया पवित्र ग्रंथ को नया रूप

अब भोजपुरी में पढ़िए राम चरित मानस, लॉकडाउन नें इस शिक्षक ने दिया पवित्र ग्रंथ को नया रूप

 कैमूर।  लॉकडाउन के दौरान घर में रहने को मजबूर हुए लोग यूं तो कई तरह के काम करते देखे गए, वहीं कुछ लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने इस समय को कुछ नया करने में बिताया। ऐसे ही एक व्यक्ति ने पवित्र रामचरित मानस की पूरी कथा को भोजपुरी में लिख डाला है। यूं तो रामचरित मानस को कई भाषा में रुपांतरित किया गया है। लेकिन भोजपुरी भाषा में इसे अब तक शायद ही लिखा गया है। 

इस ग्रंथ को भोजपुरी में रुपांतरित करनेवाले  जिले के दुर्गावती प्रखंड के कर्मनाशा का रहने वाला शिक्षक पियूष मोहन हैं।  शिक्षक पीयूष मोहन बताते हैं जब लॉकडाउन लगा तो पूरी तरह खाली बैठा था। मैंने सोचा क्यों नहीं रामचरितमानस को भोजपुरी में लिखा जाए, क्योंकि वह जिस भाषा में लिखा गया है उस भाषा में सभी के लिए पढ़ना संभव नहीं है। इसलिए मैंने अपने खाली समय में रामचरितमानस को भोजपुरी में लिखना शुरू किया और अब वे अंतिम दौर में है। लगभग 6 महीने से रामचरितमानस लिख रहे हैं। अभी कुछ अध्याय बाकी हैं जिसे कुछ दिनों में बहुत जल्द पूरा हो जाएगा। 

भोजपुरी के प्रति नजरिया बदलने के लिए किया ऐसा

भोजपुरी को बहुत ही हेय दृष्टि से देखा जाता है क्योंकि कुछ लोगों द्वारा भोजपुरी में अश्लील गाने गाकर उसको लोगों की नजरों में गिरा दिया है। इसलिए लोगों को भोजपुरी के प्रति मान सम्मान दिलाने के लिए हमने रामचरितमानस लिख दिया। कई क्षेत्रीय भाषा में लोगों को अवार्ड मिलता है लेकिन भोजपुरी को लेकर किसी ने ध्यान ही नहीं दिया, इसलिए हमने सोचा कि इसे रामचरितमानस को अपने भाषा में लिखकर भोजपुरी का मान सम्मान बढ़ाया जाए। मैं लोगों से अपील करता हूं की भोजपुरी में लोग रामचरितमानस जैसे भोजपुरी में लिखी गई किताबों को पढ़ें जिससे कि समाज में भोजपुरी का मान सम्मान बढ़ सके और स्वच्छ छवि बन सके। भोजपुरी के प्रति लोगों का सकारात्मक सोच बने सके। मेरा भोजपुरी में दो उपन्यास छप चुका है और एक और उपन्यास भोजपुरी में लिख रहे हैं। सीता जी का भी एक खंडकाव्य मैं लिख रहा हूं जो अधूरा है । उसे भी मैं जल्द पुरा कर लूंगा।

शुरु से ही इस बात को लेकर बना रखी थी सोच

कर्मनाश गांव के रहने वाले वेद प्रकाश चौबे बताते हैं हमारे गुरुजी प्युष मोहन जी के अंदर शुरू से ही टिस था कि जैसे रामायण कई भाषाओं में लिखा गया है तो क्यों नहीं इसे भोजपुरी में भी लिखा जाए, जिससे भोजपुरी जानने वाले उसको आसानी से पढ़ो समझ सके। लॉकडाउन के समय से ही उन्होंने इसे लिखना शुरू किया था। यह लिखने के बाद हम लोगों को इसके बारे में पढ़ाते भी थे हम लोग बहुत अच्छा लगता था। उनकी सोच थी कि भोजपुरी को अश्लीलता के कारण ही न जाना जाए इसलिए रामचरितमानस को भोजपुरी में लिखना शुरू किया। जिससे लोग को मैसेज आए भोजपुरी भी एक समृद्ध भाषा है ।


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