बड़ी खबर : राज्यसभा की सदस्यता को स्वीकार किये जाने की वजह का पूर्व सीजेआई ने किया खुलासा….

बड़ी खबर : राज्यसभा की सदस्यता को स्वीकार किये जाने की वजह का पूर्व सीजेआई ने किया खुलासा….

News4nation desk : देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने राज्यसभा की सदस्यता को लेकर उठ रहे सवालों और उन्होंने इसे क्यों स्वीकार किया इसका खुलासा किया है। 

उन्होंने कहा है कि यह सरकार की तरफ से मिला कोई उपहार नहीं, बल्कि राष्ट्रपति की अनुशंसा पर देश की सेवा करने का एक मौका है। 

एक निजी टीवी चैनल को दिये गए इंटरव्यू में उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता को स्वीकार किये जाने को लेकर पूछे गए सवालों का जवाब दिया है। 

उन्होंने हर एक सवाल का बड़े ही बेबाकी से जवाब दिया है। 

आइए आपको बताते है कि निजी चैनल द्वारा पूछे गये सवालों का राज्यसभा सांसद व पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई ने क्या जवाब दिया है। 

मीडिया द्वारा पूछे गए सवाल की एक पूर्व सीजेआई द्वाराराज्यसभा की सदस्यता का ऑफर स्वीकार करना सही है?

इसके जवाब में उन्होंने कहा कि पिछले दो-तीन दिनों में गजब हो गया। ऐसा लगता है मानो मैंने परमाणु बम गिरा दिया हो और पूरा देश छिन्न-भिन्न हो गया हो... सविंधान के आर्टिकल 80 के तहत राष्ट्रपति को लगा कि मुझे राज्यसभा सदस्यता से सम्मानित किया जाना चाहिए। और जब सम्मान मिल रहा हो तो स्वाभाविक है कि आप उसे लेने से इनकार नहीं कर सकते।

वहीं देश के दूसरे सबसे प्रतिष्ठित पद से अवकाश प्राप्त करने के बाद राज्यसभा सांसद का पद आखिर क्यों स्वीकार किया?

इसके जवाब में उनहोंने कहा कि मैं आपसे पूरी तरह सहमत हूं। मैंने अपने साथियों से चर्चा में कहा भी कि इस देश में दो पद बहुत प्रतिष्ठित हैं- प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश। 

मुझे बताइए कि 18 नववंबर, 2019 तक जो फैसले मैंने दिए, उनका मेरा राज्यसभा के लिए नामांकन से कोई संबंध कैसे है? मैंने अपना कार्यकाल पूरा कर लिया, मेरे फैसले वाली बेंच में पांच, तीन अन्य जज हुआ करते थे। फैसलों पर उनकी सहमति हुआ करती थी। मैंने आर्टिकल 80 पर संविधान सभा में हुई बहसों को पढ़ा और मैंने पाया कि यह एक सेवा है जिसके जरिए आप अपनी विशेषज्ञता से संसदीय चर्चाओं को समृद्धि और गंभीरता प्रदान करते हैं। 

उन्होंने कहा कि क्या यह रिटायरमेंट के बाद का उपहार जैसा है? अगर मुझे उपहार की पेशकश होती तो क्या मैं राज्यसभा की सदस्यता से मान जाता?

कई प्रतिष्ठित लोगों द्वारा उन्हें बेशर्म कहे जाने के सवाल का जवाब देते हुए पूर्व सीजेआई ने कहा कि अगर जस्टिस गोगोई को लॉ कमिशन का असाइनमेंट या एनसीएलएटी जो अभी खाली है या मानवाधिकार आयोग मिलता जो दिसंबर में खाली होने वाला है, तब न्यायपालिका का स्तर नहीं गिरता, मेरे फैसलों पर सवालिया निशान नहीं लगते? 

उन्होंने कहा कि मैं पूछता हूं कि क्या अगर कार्यकाल पूरा करने के बाद भी भारत के मुख्य न्यायाधीश को राष्ट्र सेवा का मौका मिलता है तो क्या देश में इस तरह हंगामा मचना चाहिए, क्या संविधान की कद्र इस तरह से करनी चाहिए? मैं जानना चाहता हूं कि रिटायरमेंट के बाद राज्यसभा की सदस्यता एंप्लॉयमेंट है? यह सही नहीं है। 

पूर्व सीजेआई व राज्यसभा सांसद जस्टिस गोगोई न  कहा कि मैं नेताओं का खेल नहीं जानता हूं और न समझता हूं। मैंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाग लेने का फैसला इसलिए किया क्योंकि मुझे लगा कि चीजें सुधरनी चाहिए। 

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