बड़ी खबर:सीएम के जल-नल योजना में 44 करोड़ का घोटाला, 20 मुखिया की जाएगी मुखियागिरी

बड़ी खबर:सीएम के जल-नल योजना में 44 करोड़ का घोटाला, 20 मुखिया की जाएगी मुखियागिरी

PATNA  : मुख्यमंत्री का सात निश्चय योजना नीतीश कुमार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना है, लेकिन इस योजना की हवा निकालने में अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधि तक कोई पीछे नहीं है। इस योजना में सबसे महत्वपूर्ण हर घर नल का जल योजना है लेकिन रोहतास में इस योजना में 44 करोड़ का घोटाला सामने आया है। 

मामला सामने आने के बाद जिलाधिकारी पंकज दीक्षित ने पंचायती राज विभाग को कार्रवाई के लिए अनुशंसा की है। बताया जा रहा है कि इसमें 20 मुखिया पंचायत सचिव तथा वार्ड क्रियान्वयन समिति को दोषी पाया गया है

रोहतास जिला के 20 पंचायतों के मुखिया ने अपने किए गए कार्यों का ब्यौरा सरकार को नहीं सौंपा है जिला प्रशासन द्वारा कई बार नोटिस भेजने के बावजूद जब कार्यों की उपयोगिता प्रमाण पत्र समाहित नहीं की गई तो अंततः जिलाधिकारी ने तमाम दोषी मुखिया ऊपर कार्रवाई के लिए पंचायती राज विभाग को अनुशंसा कर दिया है। डीएम ने अपनी अनुशंसा में सभी मुखिया पर एफआईआर कर उसे पदच्युत करने की सिफारिश की है।

जिनके खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गई है उनमे विक्रमगंज के घुशियां खुर्द, नूनसर नोखा के नोनसारी, छतौना, बड़ाव, कुड़ी, सोतवां, हथनी, धर्मपुरा, बडीहा, संझौली प्रखंड के चांदी इंग्लिश अमेठी करमैनी संझौली पंचायत, मंझौली, तिलौथू के इंद्रपुरी, सरैया, तिलौथू पूर्वी तथा सूर्यपुरा के बलिहार के मुखिया शामिल है।

इनके खिलाफ पंचायती राज अधिनियम 2006 की धारा 18 (5) के तहत यह अनुशंसा की गई है। इतना ही नहीं सभी मुखिया पर नीलाम वाद दायर करने तथा गबन की राशि वसूली के भी निर्देश दिए गए हैं। 

बताते चलें कि पिछले एक महीना से जिलाधिकारी ने कई बार संबंधित मुखियों को स्पष्टीकरण भेजा। लेकिन कोई भी जवाब नहीं दिया गया। साथ ही नल जल योजना में कराए गए कार्यों का (मापक पुस्तिका) एमबी भी भरी नहीं की गई है। ऐसे में उन तमाम मुखिया, पंचायत सचिवों तथा वार्ड क्रियान्वयन समिति पर कार्रवाई होना तय है।

जिला प्रशासन के इस फरमान के बाद जनप्रतिनिधियों में हड़कंप मचा हुआ है। वही दूसरी ओर जानकार कहते हैं कि आरोपी मुखिया का इतना ही दोष है कि उन लोगों ने कार्य तो कराया, लेकिन कार्यों का उपयोगिता प्रमाण पत्र ऑडिट के लिए जमा नहीं। 

जिलाधिकारी द्वारा कई बार मुखियों के साथ की गई मीटिंग में उक्त निर्देश के बावजूद जिन लोगों ने आदेश की अवहेलना की तथा ऑडिट के लिए उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं जमा हैं। ऐसे में अगर समय रहते संबंधित योजना का ऑडिट नहीं कराया जाएगा तो परेशानी और बढ़ सकती है। 

वहीं जिलाधिकारी पंकज दीक्षित कहते हैं की भ्रष्टाचार को लेकर सरकार के जीरो टोलरेंस की नीति पर जिला प्रशासन कार्य कर रहा है। किसी भी योजनाएं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सासाराम से राजू कुमार की रिपोर्ट

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