बड़ा सवालः BJP की मांग पर विचार करेंगे CM नीतीश? 'दरोगा-डीएसपी' पर तो कार्रवाई करा ही नहीं पाते भाजपा नेता, SSP पर एक्शन तो बड़ी बात है...

बड़ा सवालः BJP की मांग पर विचार करेंगे CM नीतीश? 'दरोगा-डीएसपी' पर तो कार्रवाई करा ही नहीं पाते भाजपा नेता, SSP पर एक्शन तो बड़ी बात है...

पटनाः नीतीश सरकार की पुलिस के बड़े अफसर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना देश विरोधी काम में लगे पीएफआई से कर दी। इसके बाद सत्ता के गलियारे में हंगामा बरपा है। भाजपा के दिग्गज नेता एक स्वर में पटना के एसएसपी को हटाने,कार्रवाई करने व माफी मांगने की मांग कर रहे हैं। नीतीश कैबिनेट में बीजेपी कोटे के मंत्री भी मुख्यमंत्री से पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक पर कार्रवाई की डिमांड कर रहे. अब बड़ा सवाल यही है कि क्या सीएम नीतीश कुमार बीजेपी की मांग पर पटना एसएसपी को हटायेंगे? हाल के दिनों में कुछ ऐसे वाकये हुए हैं जिस आधार पर कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री इस मांग को कतई स्वीकार नहीं करेंगे और न ही भाजपा के दबाव में आयेंगे. 

पटना SSP ने PFI की तुलना RSS से की.

फुलवारीशरीफ में पीएफआई संगठन के तीन संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद पटना एसएसपी मानवजीत सिंह ढिल्लो ने पीएफआई की तुलना आरएसएस के कर दी। इसके बाद सत्ताधारी बीजेपी नेताओं ने सीनियर पुलिस अधीक्षक को हटाने और मुकदमा दर्ज करने की मांग कर दी है। हालांकि भाजपा के आक्रामक तेवर के बाद पुलिस मुख्यालय ने पटना के एसएसपी से 48 घंटे में जवाब मांगा है। इतने भर से भाजपा शांत नहीं हुई है। भाजपा के छोटे-बड़े नेताओं ने एक स्वर से एसएसपी को हटाने की मांग की है। पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी,पूर्व केंद्रीय मंत्री व पटना के सांसद रविशंकर प्रसाद, गिरिराज सिंह, मंत्री सम्राट चौधरी से लेकर कई बड़े नेताओं ने आपत्ति दर्ज की है। साथ ही एक स्वर से उन्हें पद से हटाने को कहा है। 

इस बार बीजेपी के बड़े नेता मैदान में 

सुशील मोदी ने कहा, 'धर्मनिरपेक्ष भारत को इस्लामी देश बनाने की साजिश में लिप्त पीएफआई के संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद इस संगठन से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे देशभक्त संगठन की तुलना करना नितांत निंदनीय और अज्ञानतापूर्ण है। पटना के एसएसपी को ऐसा बयान तुरंत वापस लेना चाहिए और इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। वहीं रविशंकर प्रसाद ने भी पटना एसएसपी के बयान की निंदा की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि, 'SSP पटना की टिप्पणी जिसमें PFI की ट्रेनिंग की तुलना RSS से की गयी है, की मैं गम्भीरता से भर्त्सना करता हूँ। ये ग़ैरज़िम्मेदाराना और अशोभनीय है. पंचायती राज विभाग के मंत्री सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पटना एसएसपी पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि पटना एसएसपी का बयान दुर्भाग्यपूर्ण है। उन पर बिहार सरकार निश्चित रूप से कार्रवाई करेगी। उन्होंने सीएम से मांग की है कि मानवजीत सिंह ढिल्लो को पटना एसएसपी से हटायाा जाए।

भाजपा नेताओं की मांग को खारिज करती रही है सरकार 

भाजपा नेताओं के तल्ख तेवर के बाद क्या पटना के एसएसपी को हटाया जायेगा? क्या उन पर किसी तरह का एक्शन होगा? क्या भाजपा की मांग को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वीकार करेंगे या पहले की तरह ही रद्दी की टोकरी में डाल देंगे... इस तमाम सवालों पर राजनीतिक गलियारे में चर्चा तेज है। आखिर, चर्चा हो भी कैसे नहीं। भाजपा के नेता लगातार नीतीश सरकार की नीतियों,पुलिस- प्रशासन की कार्यशैली, भ्रष्टाचार पर सवाल खड़े कर चुके हैं। लेकिन मुख्यमंत्री के स्तर से कोई कार्रवाई नहीं होती। कुछ ऐसे वाकये हुए हैं जिस आधार पर इस बात की पुष्टि होती है कि भाजपा नेताओं की तमाम डिमांड ''नक्कारखाने में तूती की आवाज'' बन कर रह जाती है।

नीतीश की पुलिस से उठा विश्वास तो उतारना पड़ा था CRPF

हम आपको कई उदाहरण बता रहे हैं, जिससे यह साफ हो जायेगा कि बिहार के सत्ताधारी गठबंधन में बड़ा दल होने के बाद भी सरकार में भाजपा का वैल्यू नहीं। पिछले महीने अग्निपथ योजना को लेकर भारी विरोध हुआ। उपद्रवियों ने कई जिलों में भाजपा दफ्तर को फूंक डाले. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के आवास पर हमला, डिप्टी सीएम सीएम के आवास पर पथराव,दल के कई विधायकों पर हमले हुए। बीजेपी ने सीधे तौर पर प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने साफ कहा कि प्रशासन की मौजूदगी में दफ्तर जलाया गया। उन्होंने दल के नेताओ और पार्टी कार्यालयों पर हमले के लिए सीधे तौर पर प्रशासन और पुलिस को जिम्मेदार ठहराया. हालात गंभीर होते गये, भाजपा नेताओं को नीतीश सरकार की पुलिस से विश्वास उठते गया। लिहाजा केंद्रीय बल को उतारना पड़ा। भाजपा दफ्तरों पर सीआरसीपीएफ की तैनाती की गई। प्रदेश अध्यक्ष समेत एक दर्जन नेताओं को सीआरपीएफ की 'वाई' श्रेणी की सुरक्षा दी गई।भाजपा के कई बड़े नेताओं ने नीतीश सरकार को कटघरे में खड़ा किया। लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके डीजीपी ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। डीजीपी ने तो यहां तक कह दिया कि प्रदेश अध्यक्ष के घर पर हमला हुआ तो पुलिस ने ही उनकी रक्षा की। साथ ही यह भी कह दिय़ा कि जाकर पूछ लीजिए। यानी डीजीपी ने सत्ताधारी दल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।  

दारोगा-डीएसपी पर तो कार्रवाई ही नहीं, एसएसपी की बात तो दूर

इसके पहले विधानसभा के स्पीकर विजय सिन्हा के साथ सदन में जो घटना घटी उससे पूरा देश वाकिफ है। बीजेपी कोटे से अध्यक्ष बने विजय सिन्हा अपने क्षेत्र के दारोगा और डीएसपी पर कार्रवाई करवाना चाहते थे। लेकिन मुख्यमंत्री तैयार नहीं थे। विधानसभा में काफी हंगामा हुआ। अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के बीच तूतू-मैमै हुआ। इसके बाद भी जिस दारोगा को लेकर विवाद हुआ उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। सदन में ही अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से कह दिया कि ऊंची कुर्सी पर बैठे हैं और अदना सा दारोगा पर कार्रवाई नहीं करवा सकते। दिखावे के लिए सिर्फ एसडीपीओ का तबादला किया गया। इसके साथ ही प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल कई दफे शराबबंदी पर सवाल खड़े कर चुके हैं। साथ ही यह भी मांग कर चुके हैं कि शराबबंदी को विफल बड़े अफसर करा रहे। सरकार बड़े अफसरों पर कार्रवाई करे। लेकिन भाजपा नेताओं की मांग को सरकार ने अनसुनी करती रही। यह तो सिर्फ उदाहरण है, ऐसे दर्जनों मांग है जिसे सरकार खारिज कर चुकी है।

इस बार देश की सबसे बड़ी पार्टी और जिसकी बदौलत नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं, उस भाजपा की मातृ संस्था पर एक पुलिस अधिकारी ने सवाल खड़े किये हैं। इससे भाजपा तिलमिलाई हुई है। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस बार बीजेपी नेताओं की मांग पर विचार करते हैं या नहीं। 









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