JDU की पहुंच को रोकने की कोशिश...BJP का प्लान 'M', मजबूत मुस्लिमों की तलाश में जुटे बीजेपी नेता

JDU की पहुंच को रोकने की कोशिश...BJP का प्लान 'M', मजबूत मुस्लिमों की तलाश में जुटे बीजेपी नेता

PATNA: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों में पहली बार ऐसा हुआ कि भाजपा ने धुर विरोधी राजद से तो दो-दो हाथ किया ही सहयोगी जेडीयू से भी काफी आगे निकल गई है। इस बार के चुनाव में भाजपा अपनी रणनीति में सफल रही और जेडीयू तीसरे दर्जे की पार्टी बन गई। अभी जेडीयू प्लानिंग ही रच रही,इधर भाजपा इससे आगे की प्लानिंग रचकर उसे धरातल पर उतारने को लेकर अपने कार्यकर्ताओं की फौज को तैयार करने में जुट गई है।मकसद यह है कि आगामी 2025 के विधानसभा चुनाव में भाजपा सबसे बड़े दल और यूं कहें कि सत्ता तक पहुंच सके। 


जेडीयू की पहुंच को रोकने की कोशिश

बिहार बीजेपी की नजर अब पंचायत चुनाव पर है। पंचायत चुनाव में बीजेपी अपने हिडेन एजेंडा को लागू करने वाली है। बीजेपी इस एजेंडा के माध्यम से एक ओर जहां राजद के 'माई' समीकरण में सेंधमारी करने की कोशिश करेगी वहीं सहयोगी जेडीयू के एकाधिकार को भी कम करेगी। क्यों कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अल्पसंख्यक वोटों को अपने पाले यानि जेडीयू के खाते में लाने को लेकर काफी कोशिश करते हैं।हालांकि वे इसमें अब तक कितना सफल हुए ये तो जेडीयू के नेता ही बता सकते हैं.  

मजबूत मुस्लिमों की तलाश में बीजेपी

बिहार में इस साल होने वाले पंचायत चुनावों में भाजपा मुस्लिमों की तलाश में है। बीजेपी हर विधानसभा क्षेत्रों में मजबूत अल्पसंख्यक नेताओं की तलाश में जुट गई है। भाजपा वैसे अल्पसंख्यक  प्रत्याशियों को सपोर्ट करेगी जो पंचायत चुनाव जीतने वाले हों। बिहार बीजेपी ने सभी जिला कार्यसमितियों को इस एजेंडे से अवगत करा दिया है। 

जिला कार्यसमितियों को मिला टास्क

बिहार भाजपा नेतृत्व ने सभी सांगठनिक जिलों में कार्यसमिति की बैठक कराने का निर्णय लिया है। बैठक के लिए एजेंडा तय किया गया है। उसी एजेंडा के तहत प्रदेश स्तरीय नेता जिलों में जाकर संगठन की बैठक करेंगे और प्रस्तावित एजेंडा पर नेताओं को काम करने की सलाह देंगे।  3 जनवरी से 14 जनवरी तक 45 सांगठनिक जिलों में कार्यसमिति की मीटिंग आयोजित की जा रही है.  बैठक में अपने नेताओं को पंचायत चुनाव से जुड़े निर्देश दिये जा रहे हैं. पार्टी नेताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि पंचायतों के उन मुसलमान नेताओं को चुनाव में खड़ा कराएं, जिनमें जीतने की क्षमता हो। साथ ही इस जीत के बाद भाजपा से जुड़े भी रहे। ऐसे नेताओं को भाजपा के पंचायत स्तर के प्रतिनिधि पूरा सहयोग करें ताकि उसकी जीत सुनिश्चित हो सके। हालांकि बीजेपी इस मुहिम में कितना सफल होगी यह तो वक्त ही बताएगा। क्यों कि आज भी अल्पसंख्यक नेता या वोटर भाजपा को तनिक भी पसंद नहीं करते।ऐसे में भाजपा को पंचायत चुनाव में मजबूत अल्पसंख्यक कैंडिडेट को खोजने के लिए खूब पसीना बहाना होगा।


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