बिहार बीजेपी में बागियों की बढ़ती जा रही कतार, निबटने में भाजपा नेतृत्व के छूट रहे पसीने

PATNA: अपने को सबसे अलग और अनुशासित पार्टी का दावा करने वाली बीजेपी में बागी नेताओं की कतार लगातार बढ़ती जा रही है. संगठन के अनुशासन को धत्ता बताते हुए बिहार बीजेपी के कई नेताओं ने बगावत का झंडा बुलंद किया हुआ है. कोई नेता टिकट कटने से नाराज हैं तो कोई अपने समाज को बीजेपी में दरकिनार किए जाने से आहत हैं. नाराजगी ऐसी कि कई नेताओं ने पार्टी लाईन से बाहर जाकर बतौर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गये हैं. हालांकि बिहार बीजेपी ने बगावत को दबाने की हर मुमकिन कोशिश भी की है. कटिहार और अररिया लोकसभा क्षेत्रों में पार्टी अपने रूठे नेताओं को मनाने में कामयाब भी हुई है. हालांकि नेतृत्व असंतोष को पूर्ण रूपेण दबाने में सफल नहीं हो पा रही है. लिहाजा कई लोकसभा क्षेत्रों में एनडीए गठबंधन के लिए मुसीबत खड़ी हो गयी है. क्योंकि जो नेता पार्टी के खिलाफ जाकर चुनाव लड़ रहे हैं वो एनडीए गठबंधन के वोटरों को अपने पाले में लाने की कवायद में जुटे हैं.

कटिहार, अररिया से शुरू हुई बागियों की लाईन

बीजेपी के विधानपार्षद अशोक अग्रवाल ने पार्टी के खिलाफ जाकर कटिहार लोकसभा क्षेत्र से नामांकन भी कर दिया था. नामांकन के बाद बीजेपी नेतृत्व परेशान हो गया. इसके बाद पार्टी नेतृत्व डैमेज कंट्रोल में जुटी और अध्यक्ष नित्यानंद राय रूठे विधानपार्षद को मनाने उनके घर तक गए. बड़ी मुश्किल और तमाम तिकड़म भिड़ाने के बाद अंतिम दिन उन्होंने अपना नामांकन वापस लिया. तब जाकर नेतृत्व ने थोड़ी चैन की सांस ली. अररिया लोकसभा क्षेत्र में भी बीजेपी से जुड़े करीब 12 से अधिक नेताओं ने नामांकन दाखिल कर दिया था. अपने बागी कार्यकर्ताओं को मनाने के लिए संगठन ने पूरी ताकत झोंक दी. काफी प्रयास के बाद भी 2-3 उम्मीदवार मैदान में रह ही गए. यदि बांका लोकसभा क्षेत्र पर गौक करें तो बांका से बीजेपी की उपाध्यक्ष और पूर्व सांसद पुतुल कुमारी पार्टी से बगावत कर मैदान में उतर गयी. पार्टी के लाख प्रयास के बाद भी पुतुल नहीं मानी. लिहाजा पार्टी ने उन्हें छह सालों के लिए बीजेपी से निकाल दिया. बताया जाता है कि पुतुल कुमारी के बांका के चुनावी रण में उतरने से बीजेपी की सहयोगी जदयू की स्थिति कमजोर हो गयी है.

बीजेपी के एक और विधानपार्षद सच्चिदानंद राय ने पार्टी से खुलेआम बगावत कर दिया है. उन्होंने अपने समाज के लोगों को दरकिनार किए जाने के बाद पार्टी से बगावत कर दिया है. बीजेपी एमएलसी सच्चिदानंद राय ने खुलेआम नेतृत्व को चुनौती दी है और महाराजगंज सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है. सच्चिदानंद राय ने तो यहां तक कह दिया है कि उन्हें पार्टी की तरफ से किए जाने वाले अनुशासनात्मक कार्रवाई की परवाह नहीं. सच्चिदानंद राय के निर्दलीय चुनाव लड़ने के एलान के बाद बीजेपी के लिए महाराजगंज में मुश्किल खड़ी हो गयी है. वाल्मीकिनगर सीट को लेकर भी बीजेपी के सीटिंग सांसद ने बगावत कर दिया है और निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है. दरअसल सीट बंटवारे में वह सीट जदयू के खाते में चली गई है. लिहाजा वहां के बीजेपी सांसद सतीश चंद्र दूबे ने पार्टी से बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान के साथ ही जनसंपर्क कर रहे हैं. इस एलान से बीजेपी की सहयोगी जदयू के नुकासन की संभावना है. जहानाबाद सहित कई अन्य लोकसभा क्षेत्रों में भी कुछ यही स्थिति है. वहां भी पार्टी के कई सक्रिय नेता बीजेपी से रूठे हुए हैं. हालांकि अभी जहानाबाद से कोई नेता खुलकर सामने नहीं आया है. बीजेपी नेतृत्व ने तो पूर्व सांसद पुतुल कुमारी पर अनुशासन का डंडा चलाया है लेकिन दूसरे एमएलसी सच्चिदानंद राय और सांसद सतीश चंद्र दूबे पर अपनी चुप्पी बरकरार रखे हुए है. अब देखना होगा कि बीजेपी नेतृत्व अपने बागी नेताओं से कैसे पार पाती है. 

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