रंजिश का परिणाम! अधिवक्ता के लिपिक को पहले पीटकर किया अधमरा, फिर ट्रक से कूचलकर मार डाला

रंजिश का परिणाम! अधिवक्ता के लिपिक को पहले पीटकर किया अधमरा, फिर ट्रक से कूचलकर मार डाला

KATIHAR : कटिहार में अधिवक्ता के लिपिक की बेरहमी से हत्या का मामला सामने आया है। बताया गया कि अपराधियों ने पहले लिपिक को पीट-पीटकर अधमरा किया। उसके बाद भी बदमाश नहीं रूके और बचने के लिए भाग रहे घायल को ट्रक से कूचलकर मार डाला। इस दौरान वहां कई लोग मौजूद थे, जिनके सामने इस हत्या को अंजाम दिया गया। मामले में  पुलिस ने माना है कि  सुनियोजित तरीके से लिपिक की हत्या की हत्या की गई है। मुफस्सिल थाना क्षेत्र के सिरसा मोहल्ले में हुए इस वारदात में पुलिस ने एक आरोपी को भी गिरफ्तार किया है।

होली के दो  दिन बाद पंचायती से जुड़े विवाद को लेकर हत्या 

मामले में बताया गया कि  कटिहार सिविल कोर्ट में अधिवक्ता के लिपिक के तौर पर काम करने वाले शशि भूषण तिवारी की सामाजिक  रसूख बेहद अच्छा था और इसी को लेकर अक्सर उन्हें सामाजिक पंचायती में भी बुलाया जाता था। होली के दो दिन बाद इसी तरह एक पंचायती में जो उनके भाई से जुड़ा हुआ था उसी में पंचायती के दौरान कुछ लोगों से शशि भूषण की मनमुटाव हुआ था।  और आज उसी विवाद को लेकर मुफस्सिल थाना क्षेत्र के सिरसा चौक के पास ढाबा नुमा एक होटल के पास उन्हें बुलाया गया और फिर पीट-पीटकर उन्हें घायल कर दिया गया, घायल अवस्था में जब शशि भूषण भागने लगे तो सामने से गाड़ी से कुचल कर उनका हत्या कर दिया, उनके साथ मौजूद  शख्स दो नामजद आरोपियों के साथ और कई लोगों इस हत्या के बारदात में शामिल होने की बात कह रहे हैं, मृतक का पुत्र पंचायती से जुड़े विवाद की जिक्र करते हुए उसी विवाद के कारण उनके पिता की हत्या होंने की बात कह रहे है।

एक आरोपी गिरफ्तार

मुफस्सिल थाना क्षेत्र के सिरसा से जुड़े इस विवाद को पुलिस भी सुनियोजित हत्या मान रही है पुलिस के माने तो प्रथम दृष्टया  मामला सुनियोजित तरीके से हत्या लग रहा है,इस मामले में एक आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है आगे जल्द ही पूरे मामले पर खुलासा किया जाएगा।

बिहार में इन दिनों क्राइम ग्राफ में अब कटिहार के भी रेटिंग तेजी से बढ़ने लगी है हालांकि अलग-अलग थाना क्षेत्र में एक हफ्ते के अंदर तीन बड़ी हत्या की बजह  निश्चित तौर पर अलग-अलग कारणों से हुई हुई मगर किसी भी जिले में हत्या जैसे संगीन वारदात के ग्राफ तेजी से वरना पुलिस प्रशासन के लिए शुभ संकेत तो नहीं है।

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