बिहार में हावी है नॉन अटेंडिंग / फ़्लाइंग स्टूडेन्ट्स की कुप्रथा, पाटलिपुत्र सहोदय स्कूल ने दी बचने की सलाह

बिहार में हावी है नॉन अटेंडिंग / फ़्लाइंग स्टूडेन्ट्स की कुप्रथा, पाटलिपुत्र सहोदय स्कूल ने दी बचने की सलाह

PATNA: शनिवार को पाटलिपुत्र सहोदय स्कूल के तत्वावधान में नॉन अटेंडिंग / फ़्लाइंग स्टूडेन्ट्स को लेकर प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया. बिहार में 11वीं में बिना प्रवेश, बिना वर्ग उपस्थिति के सीधे 12वीं की बोर्ड परीक्षा देने का व्यवसाय चल रहा है. प्रेस वार्ता का मकसद इसी कुप्रथा से अभिभावकों को सचेत करना था. 

बताते चले की ऐसी किसी व्यवस्था को सरकार या सी बी एस ई की तरफ़ से कोई मान्यता नहीं है. इसके बावजूद प्रतिवर्ष लगभग 50 हज़ार से भी अधिक बच्चे ऐसी जालसाज़ी के शिकार हो जाते हैं. इनमें से अधिकांश छात्र 12वीं की बोर्ड परीक्षा भी उत्तीर्ण नहीं कर पाते, जिन्हें धंधेबाज़ IIT और PMT का ख़्वाब दिखाकर मोटी रक़म उगाह लेते हैं. यह रकम लाखों में होती है. विद्यालय नहीं आने से एक ओर जहां उनके व्यक्तित्व का सम्यक विकास तो नहीं हो पाता, वहीं दूसरी ओर वे अनेक बुराइयों और नशे इत्यादि का शिकार होकर अपना जीवन तबाह कर लेते हैं.

यह कुप्रथा लगभग 25 वर्ष पहले प्रारम्भ हुई थी जब बारहवीं में मात्र कुछ हज़ार विद्यार्थी हुआ करते थे, किन्तु अब बिहार और झारखण्ड में लगभग एक लाख विद्यार्थी सी बी एस ई के द्वारा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में बैठते हैं, जिसमें आधे से अधिक नॉन अटेंडिंग / फ्लाइंग कैंडिडेट होते हैं।

इस वर्ष का आंकड़ा

बिहार में कुल परीक्षार्थी: 59012

झारखण्ड में कुल परीक्षार्थी: 35566

बिहार में बालकों का उत्तीर्ण प्रतिशत: 56.66%

झारखण्ड में बालकों का उत्तीर्ण प्रतिशत: 80.10

बिहार में बालिकाओं का उत्तीर्ण प्रतिशत: 71.09%

झारखण्ड में बालिकाओं का उत्तीर्ण प्रतिशत: 89.14%

विगत वर्षों में देखा गया है कि फ़्लाइंग कैंडिडेट के रूप में परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों में लगभग आधे से अधिक हर साल असफलता का मुंह देखते हैं. यह समस्या बिहार में अधिक है. यह लड़कों में लड़कियों की अपेक्षा अधिक है. इसका परिणाम है की हर वर्ष बिहार के छात्रों के परीक्षा परिणाम भारत में सबसे नीचे होते हैं. यह भी देखा गया है कि सैकडों बच्चे अपना एडमिट कार्ड भी प्राप्त कर पाने में असफल रहते हैं और उनके जीवन से दो वर्ष व्यर्थ ही निकल जाते हैं. यह कुप्रथा बिहार के शिक्षा जगत के लिए एक कोढ़ बन चुकी है और दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है.

पाटलिपुत्र सहोदय स्कूल ने अभिभावकों से निवेदन किया कि वे नियमित कक्षाओं के द्वारा अपने बच्चों की ग्यारहवीं और बारहवीं की पढ़ाई कराएं और उनके जीवन को अज्ञानतावश नष्ट नहीं होने दें. प्रेस वार्ता के मौके पर पाटलिपुत्र सहोदय के संरक्षकगण जयराम शर्मा, रामायण प्रसाद यादव, ग्लेन गैलस्टोन के साथ अध्यक्ष डॉ राजीव रंजन सिन्हा, सचिव एडवर्ड अल्फोंसे, मानद सचिव डॉ सी बी सिंह, उपाध्यक्ष डॉ बी प्रियम, संयुक्त सचिव मधुकर झा, कोषाध्यक्ष श्री अनिल कुमार नाग सहित सहोदय के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य विद्यालयों के प्राचार्य उपस्थित थे.





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