बिहार की क्षेत्रीय पार्टी के राष्ट्रीय नेता फिर से हुए एक्टिव,लोस-रास-विप का टिकट नहीं मिला तो क्या हुआ..विधायकी का तो मिलेगा ही!

बिहार की क्षेत्रीय पार्टी के राष्ट्रीय नेता फिर से हुए एक्टिव,लोस-रास-विप का टिकट नहीं मिला तो क्या हुआ..विधायकी का तो मिलेगा ही!

PATNA: बिहार में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है।ऐसे में मौसमी नेता भी पूरी तरह से एक्टिव मोड में आ गए हैं।बिहार की एक क्षेत्रीय दल के राष्ट्रीय नेता एक बार फिर से बेचैन हो गए हैं।उनकी पार्टी के अध्यक्ष बिहार में पसीना बहा रहे और वे हस्तिनापुर में बैठे-बैठे अपने आप को साबित करने में जुटे हैं.वैसे उनकी बेचैनी कोई नई नहीं है।यूं कहें कि बिहार की छोटी पार्टी ज्वाईन करने के साथ ही उनकी लालसा हिलोरे मारने लगी थीं। 2019 लोक सभा चुनाव से पहले भी उनकी बेचैनी बिहार के लोगों ने देखी थी.वैसे उनकी बेचैनी लोकसभा चुनाव,राज्यसभा चुनाव,विधान परिषद चुनाव से ठीक पहले शुरू हो जाती है और कुछ दिन के बाद अपनी हैसियत का अंदाजा होने के साथ ही शांत हो जाती है।अब एक बार फिर से बिहार में विधान सभा के चुनाव होने हैं, ऐसे में नेता जी की बेचैनी बढ़ी हुई है.वजह है कि चलो लोकसभा-राज्य सभा और विधान परिषद का टिकट नहीं मिला तो कम से कम इस बार विधान सभा का एक टिकट तो मिल जाये......।वैसे नेता जी टिकट की लालसा में बहुत कुछ लुटा चुके हैं और पूरे बिहार में बदनाम हुए सो अलग....।

जानिए कौन हैं वो नेता जी

अब आप समझ रहे होंगे कि आखिर ये नेता जी हैं कौन...? हम आपको बताते हैं,नेता जी बिहार की एक छोटी क्षेत्रीय पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान पदधारक हैं।वे खुद बताते हैं कि उनके ऊपर सिर्फ हमारे अध्यक्ष ही हैं.नेता जी हाईटेक माने जाते हैं.वे क्षेत्र में नहीं बल्कि चैनल-मीडिया में ही दिखते हैं।अध्यक्ष सड़कों पर संघर्ष करते दिखते हैं और उनके नेता सिर्फ मीडिया में....। वे अपने आप को राजनीतिज्ञ के साथ-साथ अर्थशाष्त्री भी बताते हैं.2019 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बिहार के लोगों ने उनका नाम सुना था,जब वे अचानक नेपाल सीमा से सटे एक लोकसभा क्षेत्र में गठबंधन में बिना सीट बंटवारे के चुनाव लड़ने पहुंच गए थे। वहां जाकर वे बताने लगे कि गठबंधन में सब कुछ साफ हो गया है और सुप्रीमो के आदेश पर हम यहां आये हैं।एक महीना तक वे उस संसदीय क्षेत्र का खूब दौरा किया।लेकिन जब टिकट देने की बारी आई तो हाथ वाले नेता जी ने उन्हें ऐसी पटखनी दी कि वो दर्द आज भी समय-समय पर उभर जाती है।


कुछ महीने पहले खुले तौर पर अपने लिए मांगी थी विप की सीट

हाईटेक नेता जी के हाथ से लोकसभा का टिकट निकल गया।हालांकि उस टिकट के लिए उन्होंने काफी पैसे लुटाये थे। लोस चुनाव के दौरान ही सुप्रीमो के खास रहे एक शख्स ने तो गंभीर आरोप भी लगाए थे और करोड़ों रू देकर टिकट खरीदने की बात कही थी.खैर टिकट छिन जाने के बाद उन्हें राज्यसभा भेजने का आश्वासन दिया गया।बिहार में जब राज्यसभा की सीट खाली होने वाली थी तो फिर से उनकी बेचैनी परवान पर चढ़ी। जब नहीं मिला तब उनकी निगाहें विधान परिषद के टिकट पर गई। इस बार जब एमएलसी टिकट को लेकर गठबंधन में रस्साकस्सी चल रही थी तो नेता जी ने भी पटना में इंट्री मारी।पटना आकर तो उन्होंने साफ-साफ बयान दे दिया और हाथ वाली पार्टी को लोकसभा चुनाव के समय दिए आश्वासन की याद दिला अपने लिए विधान परिषद सीट की मांग कर दी।लेकिन नेता जी के इस बयान को उनके बॉस ने ही खारिज कर दिया। टिकट की आस में तीन दिनों तक पटना में डेरा जमाये रहने वाले राष्ट्रीय नेता को जब कुछ नहीं मिला तो  मनमसोस कर वापस हस्तिनापुर लौट गए और कुछ दिन तक पूरी तरह से शांत रहे।

इसके बाद मुखिया का इलेक्शन ही बचेगा...

अब बिहार में विधान सभा के चुनाव होने हैं।ऐसे में उनकी सक्रियता खूब बढ़ी हुई है।वे लगातार सरकार पर हमलावर हैं और सहयोगी दल के राजकुमार का गुणगान कर रहे हैं। ऐसा इसलिए कि लोकसभा-राज्यसभा-विप की सीटें नहीं मिली तो कम से कम विधायक वाला टिकट को पक्का हो जाए.......।अगर इस बार विधायक वाला टिकट नहीं मिला तो फिर क्या होगा? ऐसे में नेता जी के लिए एक ऑप्शन बचेगा अगले साल मुखिया का चुनाव तो है ही....।


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