सूबे के मुखियों की कस दी गई नकेल, काम के नाम पर माल पीने वाला खेला अब नहीं चलेगा

सूबे के मुखियों की कस दी गई नकेल, काम के नाम पर माल पीने वाला खेला अब नहीं चलेगा

पटना : बिहार के मुखिया जी की नकेल कसने के लिए सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है. जीविका दीदियों के जरिए अब सूबे के मुखियाओं की कारस्तानियों का हिसाब लेना शुरू कर दिया है.राज्य में जीविका दीदियों ने चल रही सरकारी योजनाओं की सोशल ऑडिटिंग का काम शुरू कर दी है.

मच गया है हड़कंप
जीविका दीदियों के इस काम के बाद पंचायतों में हुईं गड़बड़ियां भी सामने आनी लगी हैं. जीविका दीदियों को सरकार ने जो यह टास्क सौंपा है उससे मुखियाओं के बीच हड़कंप मचा हुआ है. इसके साथ साथ विभिन्न सरकारी योजनाओं से जुड़े अफसरों के भी पसीने छूट रहे हैं. जानकारी के मुताबिक करीब 33 जिलों में 5 हजार पंचायातों में ऑडिट काम हो रहा है. इनमें 2300 पंचायतों में यह काम पूरा कर लिया गया है. इस काम के लिए 4600 जीविका दीदियों को ट्रेनिंग दी गई है. जबकि सोशल ऑडिट के लिए 1300 जीविका दीदियां हमेश एक्टिव रहती हैं.

जीविका दीदियां मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, जन वितरण प्रणाली और शौचालय निर्माण के काम का सोशल ऑडिट कर रही हैं. जीविका दीदियों के काम करने के तरीके को देखकर लगभग 15 विभागों ने अपनी योजनाओं के ऑडिट करने की गुजारिश की है.जीविका दीदियां चल रही योजनाओं पर खर्च, गुणवत्ता आदि का आंकलन कर रिपोर्ट तैयार करती हैं. इसके साथ ही लाभुकों से बात भी करती हैं. अधिकतर अंकेक्षण कार्य मुखिया की देखरेख वाले होते हैं इसलिए मुखिया को काफी सतर्क रहना होता है. 

 

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