बिहार के सरकारी अस्पतालों से हटेंगे कबाड़, स्वास्थ्य विभाग ने एमएसटीसी लिमिटेड से किया समझौता

बिहार के सरकारी अस्पतालों से हटेंगे कबाड़, स्वास्थ्य विभाग ने एमएसटीसी लिमिटेड से किया समझौता

PATNA : बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के साथ-साथ अस्पताल परिसर की भी सूरत बदलने की दिशा में भी काम कर रहा है। इसी कड़ी में राज्य भर के सभी सरकारी अस्पतालों को व्यवस्थित और सुंदर बनाने को लेकर वर्षों से अस्पतालों में यत्र-तत्र फैले कबाड़ को हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एमएसटीसी लिमिटेड के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया है, जो भारत सरकार का उद्यम है। एमएसटीसी ई-नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से बेकार पड़े सामग्रियों को निपटाया जाएगा। ई-नीलामी ऑनलाइन प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से नीलामी आयोजित करने की प्रक्रिया है।

पांडेय ने कहा कि खराब पुराने एंबुलेंस, टूटी-फूटी मेज और कुर्सियां, बेड खराब पुराने उपकरण और इस तरह के अन्य कबाड़ ने परिसर में न केवल अनावश्यक रूप से जगह घेर रखा है, बल्कि प्रमुख पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) सहित अन्य अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के परिसर को भी गंदा कर रहा है। इससे वहां कार्य कर रहे कर्मियों और मरीजों को भी परेशानी होती है। अस्पताल परिसर में जमा पड़े कचरे ने अस्पतालों की सुदंरता खराब कर दी है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर और कबाड़ को हटाकर सभी अस्पतालों को सुंदर बनाने का फैसला किया है और इसके लिए प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। खाली किए गए स्थानों का उपयोग मूल्यवान और उपयोगी उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

पांडेय ने कहा कि अप्रैल 2021 में बिहार कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद विभाग ने एमएसटीसी लिमिटेड के साथ एमओयू साइन किया. उन्होंने कहा कि स्क्रैप सामग्री के निपटान की प्रक्रिया को क्रियान्वित करते समय सभी मौजूदा नियमों और मानदंडों का कड़ाई से पालन किया जाएगा। कबाड़ का भौतिक सत्यापन और अनुपयोगी वस्तुओं की सूची तैयार करने के लिए जिला, मेडिकल कॉलेज और प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान स्तर पर समितियां गठित की गई हैं। ई-नीलामी की प्रक्रिया शुरू करने के लिए अनुशंसित सूचियां एमएसटीसी को भेजी जाएंगी। मालूम हो कि जिला स्तर की समितियों की अध्यक्षता सिविल सर्जन करेंगे, जबकि मेडिकल कॉलेजों एवं अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में गठित समितियों की अध्यक्षता क्रमशः प्राचार्य और अधीक्षक करेंगे।

पटना से विवेकानंद की रिपोर्ट

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