बिहार विधानमंडल काजल की कोठरी, यहां चलता है कमीशन का खेल,जीवित रहते मेरा पेंशन व 50 लाख रुपया भी रोका, पूर्व बीजेपी एमएलसी का बड़ा आरोप

बिहार विधानमंडल काजल की कोठरी, यहां चलता है कमीशन का खेल,जीवित रहते मेरा पेंशन व 50 लाख रुपया भी रोका, पूर्व बीजेपी एमएलसी का बड़ा आरोप

PATNA : न्यूज4नेशन द्वारा बिहार विधान मंडल में चल रहे पेंशन घोटाले का मामला उजागर करने के बाद अब इस पर प्रतिक्रिया भी आनी शुरू हो गई है। जिनमें एक बड़ा खुलासा बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता और पूर्व एमएलसी ने किया है। भाजपा नेता ने सीधा आरोप लगाया है कि विधान मंडल में मेडिकल बिलों के भुगतान, कैंटीन व्यवस्था, इत्यादि में कमीशन का खेल चलता है। सही मायने में बिहार विधानसभा और विधान परिषद काजल की कोठरी की तरह है।

सुशासन बाबू पर लगाया बड़ा आरोप

भाजपा के पूर्व एमएलसी कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि वह 2020 तक विधान परिषद के सदस्य थे, अभी भी जीवित हूं, पर अभी तक पेंशन नहीं दिया गया है। जो करीब 50 लाख से भी अधिक है। भाजपा नेता इसके लिए सीधे – सीधे सुशासन बाबू को जिम्मेदार ठहरा दिया है। उनका आरोप है कि यह सब उनके इशारे पर ही हो रहा है। मैं स्वयं सत्य बोलने, परिषद के समिति के दस्तख़ती बैठकों के विरोध के कारण मेरा भत्ता, सीटिंग अलाउंस, ही नहीं आज तक पेंशन भी नहीं दिया जा रहा है। भाजपा नेता व पूर्व एमएलसी ने सीधा आरोप लगाया है कि विधान मंडल में मेडिकल बिलों के भुगतान, कैंटीन व्यवस्था, इत्यादि तो कमीशन का खेल चलता है। सही मायने में बिहार विधानसभा और विधान परिषद काजल की कोठरी की तरह है।

पेंशन के लिए करना होगा सत्याग्रह

 उन्होंने कहा कि यह अत्यंत ही खेदजनक है। बिहार विधान परिषद में भी इस तरह का खेल, गोलमाल और घोटाले हो रहे है। पेंशन के लिये लगता है, परिषद में अब सत्याग्रह करना पड़ेगा।

आरटीआई से खुला था विभाग में गड़बड़झाले का आरोप

दरअसल, पूरे मामले का खुलासा आरटीआई से हुआ है। बिहार के जाने-माने आरटीआई एक्टिविस्ट शिवप्रकाश राय ने बिहार विधानसभा सचिवालय से पूछा था कि विधानसभा के पूर्व सदस्य जो पेंशन पाते हैं उनकी मृत्यु के बाद आश्रित पत्नी-पति को पारिवारिक पेंशन दिया जाता है उसकी सूची उपलब्ध करायें। जिसमें आरटीआई से जो जानकारी मिली है उससे सिस्टम नंगा हो गया है। बक्सर के राजपुर से विधायक रहे रामनारायण राम की पत्नी गीता देवी(फर्जी पत्नी) के नाम पर हर महीने पेंशन मद में 46500 रू खाते में जा रहा है। जबकि पूर्व विधायक रामनारायण राम की पत्नी गीता देवी थी हीं नहीं। उनके निधन के बाद पत्नी के नाम में गीता देवी जोड़ दिया गया और फिर पत्नी बनाकर हर महीने पेंशन की राशि का उठाव होने लगा। यह फर्जीवाड़ा किसने किया? क्या यह काम बिना विधानसभा सचिवालय के मिलीभगत के संभव है? 

पूर्व विधायक के दत्तक पुत्र व MLA बोले- पत्नी हैं ही नहीं तो पेंशन कैसे मिलेगा

स्व. रामनारायण राम की पत्नी जिंदा नहीं हैं. बचपन में ही शादी हुई फिर वो कभी इनके घर नहीं आईं. इस बात की पुष्टि उनके भतीजे सह दत्तक पुत्र व राजपुर विस से कांग्रेस विधायक विश्वनाथ राम ही कर रहे। विधायक विश्वनाथ राम ने न्यूज4नेशन से बातचीत में कहा कि हमारे चाचा की शादी बचपन में ही हो गई थी। इसके बाद पत्नी नहीं आईं। हमारे चाचा रामनारायण राम 1985 से लेकर 1995 तक विधायक रहे थे। 2016 में उनका निधन हो गया। उन्होंने सारी संपत्ति हमें दे दी। यूं कहें कि हम उनके दत्तक पुत्र हैं। उनसे जब पूछा गया कि जब आपके चाचा की पत्नी नहीं हैं तो फिर गीता देवी के नाम पर हर महीने 46500 रू का पेंशन विधानसभा सचिवालय से कैसे जा रहा?

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