चुनाव में 'लुटिया' डूबने के बाद LJP नेताओं ने सुप्रीमो को दी सलाह, बिहार की राजनीति करना है तो .....

चुनाव में 'लुटिया' डूबने के बाद LJP नेताओं ने सुप्रीमो को दी सलाह, बिहार की राजनीति करना है तो .....

 PATNA: बिहार विधानसभा चुनाव में लोजपा अपने दम पर चुनाव लड़ी थी। विस चुनाव में लोजपा का मकसद जेडीयू को हराना था साथ ही 20-25 सीटें लाकर फिर से 2005 वाली स्थिति में ला खड़ा करना था। लेकिन बिहार के वोटरों ने चिराग पासवान की पार्टी लोजपा की हवा निकाल दिया। जनता ने लोजपा को पैर से नीचे से जमीन खीच ली। चिराग पासवान चले थे नीतीश कुमार को जेल भेजने और बीजेपी के साथ मिलकर बिहार में सरकार बनाने लेकिन सारी मंशा धरी की धरी रह गई। चिराग न तो सीएम नीतीश को जेल ही भेज सके और न भाजपा के साथ मिलकर सरकार बना पाये।अब तो लोजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने चिराग को सलाह दी है कि बिहार में रहना होगा तभी कुछ संभव है।

LJP नेताओं ने सुप्रीमो को दी सलाह

विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद अब नेताओं के साथ मंथन में जुटे हैं। सुुप्रीमो पिछले पांच दिनों से पटना में हैं और मंथन कर रहे हैं। वे अपने नेताओं से मिलकर हार की वजह तलाश रहे हैं। आज भी चिराग पासवान ने लोजपा दफ्तर में पार्टी के सांसद , पूर्व सांसद , प्रदेश संसदीय बोर्ड , प्रदेश के सभी उपाध्यक्ष ,प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष व पार्टी के सभी प्रवक्ताओं के साथ बैठक की। चिराग पासवान ने पार्टी नेताओं के साथ चुनावी हार के कारण जाना। चिराग ने नेताओं से पूछा कि आखिर लोजपा को इतनी बड़ी हार कैसे मिली....।इसके साथ ही चिराग ने पार्टी नेताओं के साथ अगली रणनीति पर भी चर्चा की।सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने सुप्रीमो चिराग पासवान को आईना दिखा दिया। पार्टी नेताओं ने मीटिंग में अपने सुप्रीमो को सलाह दिया कि बिहार की राजनीति करना है तो बिहार में समय देना होगा। बिना समय दिये संगठन की मजबूती नहीं मिल सकती है।वरिष्ठ नेताओं की सलाह का कई अन्य नेताओं ने समर्थन भी किया। 

तो नकली हनुमान साबित हुए चिराग

बिहार चुनाव के बाद हालात ऐसी हो गई कि अपने आप को पीएम मोदी का हनुमान बताने वाले चिराग पासवान पिता के निधन से खाली हुई सीट भी पाले में नहीं रख सके। बिहार के वोटरों ने जब लोजपा को ताकत का अहसास करा दिया है। इसके बाद अब लोजपा सुप्रीमो चिराग पासवान डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। जानकार बताते हैं कि चिराग पासवान अब नेताओं के साथ बैठक कर पार्टी के भीतर सुलग रही नाराजगी को कम करने की कोशिश में जुटे हैं.  


अंदर ही अंदर पार्टी के कई नेता नाराज

जिस तरह से बिहार में लोजपा का ग्राफ लगातार गिर रहा है । उससे एक बात तो स्पष्ट हो गई है कि आने वाला समय लोजपा के लिए चुनौती पूर्ण है। चिराग के निर्णय से भीतर ही भीतर लोजपा के नेताओं में भारी असंतोष है। पार्टी के कई नेता अपरोक्ष रूप से यह बताते हैं कि चिराग सामूहिक निर्णय नहीं लेते बल्कि थोपते हैं और मजबूरन में उस थोपे हुए निर्णय को कार्यकर्ताओं को पालन करना पड़ता है। इस चुनाव में लोजपा नेतृत्व की तरफ से थोपे गए निर्णय का खामियाजा भुगतना पड़ा है।

पीएम मोदी के नकली हनुमान निकले चिराग

 पासवान के दामाद अनिल साधु ने चिराग पर अटैक करते हुए कहते हैं कि पूरे चुनाव में अपने आप को पीएम मोदी का हनुमान बताने वाले चिराग को भाजपा ने राज्यसभा की सीट भी नहीं दी। ये पीएम मोदी के कैसे हनुमान थे जो अपनी पिता की राज्यसभा सीट भी नहीं बचा पाये। रामविलास पासवान के निधन के बाद खाली हुई सीट को भाजपा ने चिराग  से छीन ली। ऐसे में तो यही कहा जा सकता है कि ये पीएम मोदी के नकली हनुमान थे। चिराग कहते चल रहे थे कि उनके दिल में पीएम मोदी बसते हैं,वे ये कभी नहीं कहे कि उनके दिल में रामविलास पासवान बसते हैं। लेकिन हम उनके दामाद हैं हमारी छाती में एक तरफ रामविलास पासवान हैं तो दूसरी तरफ बाबा साहब अंबेडकर बसते हैं.

लोजपा 21 वां स्थापना दिवस नहीं मना पायेगी

रामविलास पासवान के दामाद ने आगे कहा कि 28 नवंबर को लोजपा का 20 वां स्थापना दिवस कार्यक्रम था। लेकिन हमने देखा कि काफी कम लोग शिरकत किये थे। अधिकांश नेताओं ने पार्टी से दूरी बना ली है। जो बचे हुए हैं वो भी आगे चलकर निकलने वाले हैं।रामविलास पासवान के निधन के बाद पार्टी दूसरे एजेंडे पर निकल गई है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि लोजपा 21 वीं स्थापना दिवस भी नहीं मना पायेगी।

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