बिहार में अजीब हालात, जल संसाधन विभाग में बिना इंजीनियर के ही चल रहा काम, कनीय अभियंता यांत्रिक के सारे पद खाली

बिहार में अजीब हालात, जल संसाधन विभाग में बिना इंजीनियर के ही चल रहा काम, कनीय अभियंता यांत्रिक के सारे पद खाली

PATNA: बिहार में किसान भगवान भरोसे हैं. बिहार की अधिसंख्य आबादी कृषि पर आधारित  है। जिस विभाग पर सिंचाई के लिए खेतों तक पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी है उस विभाग में अभियंता ही नहीं हैं.जब अभियंता ही नहीं है तो काम कैसे होता होगा यह आसानी से समझा जा सकता है। आरटीआई से खुलासा हुआ है कि जल संसाधन विभाग में इंजीनियरों की भारी कमी है. खासकर कनीय अभियंताओं की तो घोर कमी है.

आरटीआई एक्टिविस्ट शिव प्रकाश राय ने जल संसाधन विभाग से सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी. जल संसाधन विभाग ने 24 अगस्त 2020 को आरटीआई आवेदन पर जानकारी दी है.विभाग ने स्वीकार किया है कि जूनियर इंजीनियरों की भारी कमी है।

कनीय अभियंता यांत्रिक में कार्यरत बल-0

जल संसाधन विभाग की तरफ से जो जानकारी दी गई है. राज्य मुख्यालय से लेकर जिला स्तर तक अभियंता सहित विभिन्न स्तर के कार्यरत बल रिक्ति बल का ब्योरा उपलब्ध कराया गया है. कनीय अभियंता (असैनिक) में स्वीकृत बल- 3520, कार्यरत बल- 1035, रिक्त बल- 2485 है।वहीं कनीय अभियंता यांत्रिक में  स्वीकृत बल- 264, कार्यरत बल-0, रिक्त बल-264 है.अब यह समझ सकते हैं कि कनीय अभियंता यांत्रिक में  एक भी जूनियर इंजीनियर नहीं हैं।यानि जल संसाधन विभाग बिना हैड्स के ही काम कर रहा है।

क्या कहते हैं आरटीआई कार्यकर्ता

बिहार के आरटीआई कार्यकर्ता शिवप्रकाश राय कहते हैं कि बिहार कृषि प्रधान राज्य है।नहरों के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचाने का जिम्मा जल संसाधन विभाग का है।लेकिन विभाग में सबसे निचला और महत्वपूर्ण कड़ी जूनियर इंजीनियर की होती है।विभाग की तरफ से जो जानकारी दी गई है उसके अनुसार कनीय अभियंता की घोर कमी है।

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