बिहार में शिकस्त खाने के बाद राजद-कांग्रेस हो गई पस्त, अब छोटे दल के नेता भी दिखाने लगे आंख...धूर विरोधियों से मिला रहे हाथ

बिहार में शिकस्त खाने के बाद राजद-कांग्रेस हो गई पस्त, अब छोटे दल के नेता भी दिखाने लगे आंख...धूर विरोधियों से मिला रहे हाथ

पटनाः लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी राजद और दूसरे नंबर की पार्टी कांग्रेस दोनो पस्त हो गई है।दोनों दलों की हालत एक जैसी हो गई है.हार के सदमा को सबसे बड़े दल के राजकुमार तेजस्वी यादव बर्दाश्त नहीं कर पाए।वे पिछले तीन महीनों से पूरी तरह से राजनीतिक गतिविधियों से अलग हैं.वे कहां हैं किसी को पता नहीं... यहां तक की उनकी अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायकों को यह जानकारी नहीं की उनके सेनापति कहां हैं।बिना सेनापति के सेना भटकाव की स्थिति में आ गई है।

कहने को भले हीं राजद ने संगठनात्म चुनाव और सदस्यता अभियान की शुरूआत की है.लेकिन हकीकत यही है कि लालू प्रसाद के जेल में होने और तेजस्वी यादव के अदृश्य होने की वजह से पूरी पार्टी में असमंजस की स्थिति है।पार्टी के नेता और विधायक यह समझ नहीं पा रहे कि आखिर राजद किस और ओर जा रही।अब तो राजद के विधायक यह कहने से भी नहीं चुक रहे कि अगर यही स्थिति रही तो राजद को अगले विधानसभा चुनाव में भारी नुकसान हो सकता है।विधायक यह कहने लगे हैं कि बिना नेतृत्व के राजद के कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर गया है।पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी और ऱघुवंश प्रसाद सिंह ने तो खुलकर कह दिया है कि अगर तेजस्वी यादव और संगठन की यही स्थिति रही तो फिर 2020 में पार पाना मुश्किल है।

हताश मुद्रा में है कांग्रेस

वही हाल कांग्रेस की भी है।चुनाव हारने के बाद बिहार कांग्रेस भी पूरी तरह से बेपटरी हो गई है।यूं कहें कि पूरी पार्टी हताश की मुद्रा में है।तमाम सांगठनिक और राजनीतिक गतिविधियां बंद सी हो गई हैं।

बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने इस्तीफा कर दिया।उनके बाद सह प्रभारी ने भी इस्तीफे की घोषणा कर दी।बिहार के कांग्रेस के कई नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष को हटाने की मांग कर दी।बिहार कांग्रेस 2020 विधानसभा चुनाव की तैयारी क्या करेगी अभी तो संगठन के भीतर हीं शह-मात का खेल चल रहा है।

महागठबंधन पर आक्रामक हैं मांझी

इधर महागठबंधन के छोटे दल के नेताओं ने आंख दिखाना शुरू कर दिया है। हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतनराम मांझी ने तेजस्वी को नेता मानने से इंकार कर दिया है।उन्होंने तो यहां तक कह दिया है कि महागठबंधन ने उऩको छलने का काम किया है।अगर जरूरत पड़ी तो तो बिहार की सभी विधानसभा सीटों को चुनाव लड़ने को तैयार हैं।

तेजस्वी के धूर विरोधी से पींगे बढ़ा रहे मांझी

जीतनराम मांझी ने तो अब तेजस्वी यादव के धूर विरोधी पप्पू यादव से भी मुलाकात की है।दरअसल मांझी लालू परिवार के विरोधी पप्पू यादव से मुलाकात के बहाने यह मैसेज देने की कोशिश में हैं कि अगर उनको महागठबंधन में बेहतर भागीदारी नहीं मिली तो फिर वे तीसरा विकल्प तलाशेंगे।

कुशवाहा ने साध रखी है चुप्पी

हालांकि महागठबंधन के चौथे सहयोगी उपेन्द्र कुशवाहा ने अभी तेजस्वी यादव पर कोई सवाल नहीं किया है।वे इन दिनों अपनी पार्टी की नजबूती पर ध्यान दे रहे हैं।उनकी कोशिश है कि कि बेपटरी हुए संगठन को विधानसभा चुनाव से पहले मजबूत किया जाए।इसको लेकर वे सदस्यता अभियान पर ध्यान फोकस किए हुए हैं। 

वहीं वीआईपी के मुकेश सहनी भी अँदरखाने से महागठबंधन को लेकर खुश नहीं हैं।अगर यही स्थिति रही तो 2020 के विधानसभा चुनाव से पहले सहनी भी महागठबंधन को बॉय-बॉय कह सकते हैं।

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