नीतीश सरकार ने नियोजित शिक्षकों को 2015 चुनाव से पहले भी थमाया था सेवा शर्त का झुनझुना, अब 2020 विस चुनाव से पहले भी CM ने फेंका जाल...

नीतीश सरकार ने नियोजित शिक्षकों को 2015 चुनाव से पहले भी थमाया था सेवा शर्त का झुनझुना, अब 2020 विस चुनाव से पहले भी CM ने फेंका जाल...

पटनाः क्या बिहार में नियोजित शिक्षकों को सरकार बेवकूफ बना रही है? सेवा शर्त लागू करने के नाम पर नीतीश सरकार करीब 4 लाख नियोजित शिक्षकों को चारा डालने की कोशिश कर रही ताकि इसका लाभ आगामी चुनाव में भी लिया जा सके। वैसे पिछले दो चुनाव से सीएम नीतीश की नियोजित शिक्षकों और उनके परिजनों के बड़े वोट बैंक पर नजर रहती है। विधान सभा चुनाव से ठीक पहले नीतीश सरकार सेवा शर्त लागू करने के नाम पर झुनझुना थमा देती है।चुनाव खत्म होने के बाद मामले को लटका दिया जाता है।एक बार फिर से सीएम नीतीश ने चुनाव से ठीक पहले नियोजित शिक्षकों को लुभाने-रिझाने की भरपूर कोशिश की है और सेवा शर्त रूपी जाल को फेंका है. स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री ने मंच से शिक्षकों के लिए बड़ा ऐलान किया.मुख्यमंत्री ने ऐलान किया है कि नियोजित शिक्षकों को जल्द सेवा शर्त की सुविधाएं मिलेंगी। इसकी घोषणा जल्द कर दी जाएगी। नियोजित शिक्षकों को ईपीएफ और अन्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा। इसके अलावा 33916 शिक्षकों को बहाली होगी।

चुनाव से पहले फिर से सेवा शर्त का जिन्न निकला बाहर

बिहार में आगामी कुछ महीनों में विधान सभा के चुनाव होने हैं।लिहाजा सेवा शर्त का मामला एक बार फिर से तेजी से उठा है।बड़ा सवाल यही है कि चुनाव से पहले सेवा शर्त लागू करने को लेकर ऐलान क्यों होता है?न्यूज4नेशन आपको बता रहा है कि कि तरह नीतीश सरकार चुनाव से पहले नियोजित शिक्षकों को झांसा देती है।शिक्षा विभाग का एक पत्र सरकार की मंशा पर कई सवाल खड़े करती है।दरअसल 2015 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नियोजित शिक्षकों की सेवा शर्त को लेकर सरकार ने बड़ा आदेश जारी किया।तब लगा कि बस अब शिक्षकों की बड़ी मांग पूरी होने वाली है।शिक्षा विभाग ने 11 अगस्त 2015 यानि आज से ठीक पांच साल पहले और विधान सभा चुनाव से करीब 3 महीने पूर्व एक आदेश जारी किया था। 


तीन महीने में रिपोर्ट देना था..पांच साल हो गए

शिक्षा विभाग के 11 अगस्त 2015 के आदेश में कहा गया था कि विभिन्न शिक्षक एवं पुस्तकालय अध्यक्ष संगठनों द्वारा नियोजित शिक्षकों एवं पुस्तकालय अध्यक्ष को वेतनमान देने,सेवा शर्त की संरचना करने के संबंध में काफी समय से मांग की जा रही थी. सरकार नियोजित शिक्षकों के वेतन निर्धारण एवं उनकी सेवा शर्त निर्धारण के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित की. मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की अनुशंसा के आलोक में नियोजित प्रशिक्षित शिक्षक एवं पुस्तकालय अध्यक्ष की सेवा शर्त के संबंध में अलग से समिति गठन का निर्णय लिया गया. नियोजित शिक्षकों का सेवा शर्त अंतर्गत सेवा निरंतरता, स्थानांतरण, सेवाकालीन प्रशिक्षण का अवसर, अनुशासनिक प्राधिकार एवं अन्य सेवा शर्तों के निर्धारण हेतु वित्त विभाग शिक्षा विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग, नगर विकास विभाग, पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव, सचिव एवं प्रधान अपर महाधिवक्ता की एक समिति गठित की जाती है. यह समिति विस्तृत जांच कर 3 माह के अंदर अपनी अनुशंसा सरकार को समर्पित करेगी.

एक बार फिर से चुनाव से पहले सरकार की खुली नींद

2015 विस चुनाव से पहले यह आदेश जारी होता है।नियोजित खुश हो गए कि अब नीतीश सरकार ने उकी मांग मान ली है।एक बार फिर से नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बन गए।फिर यह आदेश रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया।अब एक बार फिर से चुनाव सामने है लिहाजा नियोजित शिक्षकों की सेवा शर्त देने की हवा बनाई जा रही है।सरकार ने कुछ समय पहले सेवा शर्त संबंधी कमेटि का पुनर्गठन किया।कमिटि की बैठक भी बलाई गई।इसके बाद एक बार फिर से सीएम नीतीश कुमार ने 15 अगस्त के दिन गांधी मैदान में अपने संबोधन में जल्द सेवा शर्त लागू करने की बात दोहरा रहे हैं।

शिक्षकों को सीएम नीतीश की घोषणा पर नहीं हो रहा विश्वास

हालांकि कि कई शिक्षक संगठनों ने कहा है कि सरकार 2015 के विधान सभा चुनाव से पहले इस तरह की बात की थी।लेकिन चुनाव के बाद नीतीश सरकार 5 सालों तक सोई रही।अब जबकि एक बार फिर से चुनाव होने हैं तो नीतीश कुमार को नियोजित शिक्षकों की सेवा शर्त की याद आई है।

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