बिहार में एक और घोटाला, अब बॉडीगार्ड रखने के नाम पर किया गया सौ करोड़ से अधिक का फर्जीवाड़ा, कैग की रिपोर्ट से हुआ खुलासा

बिहार में एक और घोटाला, अब बॉडीगार्ड रखने के नाम पर किया गया सौ करोड़ से अधिक का फर्जीवाड़ा, कैग की रिपोर्ट से हुआ खुलासा

पटना। बिहार में एक के बाद लगातार नए घोटालों की पोल खुलती जा रही है, कोरोना घोटाला, पोस्टमार्टम घोटाला के बाद अब बॉडीगार्ड घोटाला सामने आया है, जिसमें बताया जा रहा है कि सौ करोड़ से अधिक का फर्जीवाड़ा किया गया है। यह आरोप किसी नेता ने नहीं, बल्कि नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक यानी CAG की रिपोर्ट से सामने आया है। जिसके अनुसार बिहार में कई आपराधिक किस्म के लोगों को भी सरकार की तरफ से बॉडीगार्ड रखने की सुविधा दी गई, लेकिन इसके एवज में उनसे किसी प्रकार की वसूली नहीं की गई.

आरटीआई के जरिये कैग की रिपोर्ट से जो बात पता चली है, वह कहती है कि सिस्टम की मिलीभगत से बॉडीगार्ड घोटाला कर राज्य सरकार को 100 करोड़ से ज्यादा के राजस्व का चूना लगाया गया है. आरटीआई एक्टिविस्ट शिवप्रकाश राय ने बड़ी संख्या में लोगों को बॉडीगार्ड मुहैया कराने के मामले में सूचना के अधिकार कानून के तहत जानकारी मांगी थी. सीएजी से मांगी गई इस जानकारी में प्रदेश के दर्जनभर से ज्यादा जिलों में वित्तीय गड़बड़ियां सामने आई हैं. 

कैग ने खुलासा किया है कि 2017 से लेकर 2021 तक बॉडीगार्ड आवंटन में यह घोटाला किया गया है. कैग की रिपोर्ट से बिहार पुलिस मुख्यालय भी अवगत है और कई जिलों के डीएम-एसपी पर भी जांच की आंच आ सकती है। सरकार ने अरवल जिले में सबसे ज्यादा 1.24 करोड़ रुपये बॉडीगार्ड पर खर्च किए. वहीं अररिया में भी 1 करोड़ से ज्यादा की गड़बड़ी की गई.  इसके अलावा समस्तीपुर में 1 करोड़, पटना में 87 लाख, गया में 73 लाख और बक्सर में 44 लाख रुपये के साथ ही कई अन्य जिलों में भी निजी लोगों के बॉडीगार्ड पर पैसे खर्च हुए. इससे सरकार को अरबों रुपये का नुकसान हुआ.

कई माफिया किस्म के लोगों को दी गई सुरक्षा, नहीं की गई रिकवरी

आरटीआई एक्टिविस्ट ने नियमों का हवाला देते हुए बताया कि हाईकोर्ट का साफ आदेश है कि वैसे लोगों पर ही बॉडीगार्ड के मद में सरकार पैसे खर्च कर सकती है जो सामाजिक सरोकार से जुड़े हों या उनकी जान पर किसी प्रकार का खतरा हो. लेकिन रिपोर्ट में सामने आया है कि कई आपराधिक प्रवृत्ति और माफिया किस्म के लोगों को भी बॉडीगार्ड मुहैया कराए गए. इसके बदले में राशि नहीं वसूली गई. आरटीआई कार्यकर्ता ने कहा कि अगर पैसे की रिकवरी नहीं होती है, तो वह सरकार के खिलाफ कोर्ट जाएंगे.


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