बिहार में शराब के कारण हो रहा नए नक्सलवाद का सूत्रपात, इस बार विचार नहीं, पैसे कमाना है मुख्य मकसद

बिहार में शराब के कारण हो रहा नए नक्सलवाद का सूत्रपात, इस बार विचार नहीं, पैसे कमाना है मुख्य मकसद

पटना। बिहार में शराबबंदी को लेकर हर तरफ चर्चा हो रही है। विशेष रूप से हालिया घटनाओं को लेकर सरकार पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इन सबके विपरीत बिहार सरकार में मंत्री रहे अजीत कुमार शराबबंदी को नक्सलवाद से जोड़ दिया है। उन्होंने कहा आज शराब के कारण एक अलग प्रकार का नक्सलवाद बिहार में पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने इमानदारी से शराबबंदी लागू करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने जिन्हें जिम्मेदारी दी है, वह बेईमान है। पहले लोग छिपकर शराब बेच रहे थे, अब खुलकर बेचने लगे हैं। 

आज स्थिति पूरी तरह से खराब हो गई है। उन्होंने कहा कि तिरहूत आईजी वहां जांच के लिए जा रहे हैं और उसी जिले में एक सींमेट कारोबारी की हत्या हो जाती है और अपराधी खुलेआम पर्चा फेंककर धमकी देते हैं कि रंगदारी नहीं देने पर उनकी हत्या कर दी जाएगी। यह बेहद चिंता का विषय है। पूर्व मंत्री ने कहा कि आज बिहार में शराब के कारण नक्सलवाद पैदा हो गया है, जो बहुत ही खतरनाक है। उन्होंने उत्तर बिहार के गंडक नदी से सटे गरीबों के परिवार में 95 फीसदी लोग शराब के कारोबार से जुडे़ हैं। उन्होंने कहा कि पहले लोग पुलिस को सूचित करते थे, आज सूचना करने पर हत्या का डर बना रहता है। यह कुटीर उद्योग का रूप ले चुका है। अब धन संचय का बड़ा जरिया बन गया है। 

पूर्व मंत्री ने कहा कि अधिकारी चाहे तो राज्य की सीमा पर कड़ी चौकसी करे बिहार में शराब आने पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी। बीएसएफ ने भी माना है कि सिर्फ 30 फीसदी ही कार्रवाई की जा रही है। आज स्थिति है कि शराब के कारोबारी हिंसक हो गए हैं, इसमें बड़ी कार्रवाई करने की जरुरत है। उन्होंने भाजपा नेता संजय पासवान द्वारा शराबबंदी की पुन समीक्षा करने की मांग को राजनीति से प्रेरित बताया। पूर्व मंत्री ने विजेंद्र यादव द्वारा दारोगा की हत्या को मामूली घटना बताने को बेहद निंदनीय बताया। 


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