कोरोना के कारण नहीं आई बारात तो सात फेरे लेने दूल्हे के घर पहुंच गई दुल्हन

कोरोना के कारण नहीं आई बारात तो सात फेरे लेने दूल्हे के घर पहुंच गई दुल्हन

BETTIAH : हिन्दू धर्म ग्रंथों में शादी के रिश्ते को बहुत पवित्र माना जाता है। हर शादी में दुल्हन बनी लड़की का सपना होता है कि उसके सपनों का राजकुमार बारात लेकर आए और सात फेरे लेकर ससुराल जाए। लेकिन, कोरोना महामारी ने इस सपने को ग्रहण लगा दिया है। यहां महामारी के कारण लोग अपनी शादियों को कैंसल कर रहे हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपनी शादी के लिए रिस्क लेने से पीछे नहीं हट रहे हैं। शादी का एक ऐसा ही मामला सामना आया है बेतिया जिले से। लेकिन इस शादी में न तो दुल्हन के घर बारात आई, न दुल्हा अपनी दुल्हन को लेने के लिए गया।

दरअसल, बगहा के रत्नमाला वार्ड 31 निवासी मंटू राउत एवं सुखमीना देवी की सुपुत्र कुमारी अंशु की शादी बेतिया के तीनलालटेन निवासी हरेंद्र किशोर राउत और गीता देवी के सुपुत्र विकास कुमार उर्फ बिट्टू से तय हुई थी. 23 अप्रैल को बेतिया से रत्नमाला शादी के लिए बारात आनी थी. सब कुछ तय था, लेकिन कोविड के बढ़ते प्रकोप और सरकार के दिशा निर्देश के आलोक में वधु पक्ष और वर पक्ष की सहमति से बारात लाना स्थगित कर दिया गया. 


दूल्हे के घर पहुंचा दुल्हन का परिवार

दोनों पक्षों ने अपने रिश्तेदारों को एक मैसेज भेजा. जिसमें कहा कि कोविड को देखते हुए नहीं आने की बात कही गई, जिसके लिए क्षमा मांगी गई। उसके बाद दुल्हन बनी अंशू अपने परिवार के साथ दूल्हे के पास पहुंच गई.  जहां दुर्गा मंदिर स्थित विवाह भवन से सादे समारोह में वर वधु का विवाह सम्पन्न हुआ.

परिवार को कोरोना से बचाने के लिए उठाया कदम

इस बाबत स्थानीय वार्ड 31 की वार्ड आयुक्त तबस्सुम जहां, वार्ड आयुक्त प्रतिनिधि सह जदयू नगर अध्यक्ष मो गयासुद्दीन, वधु पक्ष से सुनील कुमार 'राउत' आदि ने कहा कि कोविड को लेकर सरकार के दिशा निर्देश के अनुपालन के आलोक में यह साहसिक एवं स्वागतयोग्य निर्णय लिया गया.वहीं लड़की के माता-पिता, दादी एवं परिवारवालों में दादा यदुनंदन राउत सहित अन्य लोगों ने कहा कि कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रभाव के कारण आपसी सहमति से ये निर्णय लिया गया ताकि स्थानीय जनता, आगंतुक एवं दोनों पक्ष को सहूलियत हो। 



Find Us on Facebook

Trending News