यह है बिहार की सरकारी लालफीताशाही, 10 दिन बाद भी ईएसआईसी हॉस्पिटल में कोरोना के लिए 500 बेड रिजर्व करने को नहीं मिली मंजूरी

यह है बिहार की सरकारी लालफीताशाही, 10 दिन बाद भी ईएसआईसी हॉस्पिटल में कोरोना के लिए 500 बेड रिजर्व करने को नहीं मिली मंजूरी

PATNA : एक तरफ राजधानी पटना के सरकारी से लेकर प्राइवेट अस्पतालों में बेड की कमी है। लोगों को इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है,  वहीं दूसरी तरफ सरकारी अधिकारियों और बाबूओं की लालफीताशाही भी कम होती नजर नहीं आ रही है। मामला बिहटा स्थित ईएसआईसी हॉस्पिटल से जुड़ा है जिसके लिए बिहार सरकार ने लगभग 10 दिन पहले डीआरडीओ को लेटर लिखा था जिसमें अस्पताल के 500 बेड कोल्ड मरीजों के लिए तैयार करने की मांग की गई थी। स्थिति यह है राज्य सरकार के लेटर को डीआरडीओ से अब तक मंजूरी नहीं दी गई है। फिलहाल वहां 50 बिस्तर ही कोवि मरीजों के लिए उपलब्ध है। राज्य स्वास्थ्य समिति के एक्सक्यूटिव डायरेक्टर का कहना है कि ईएसआईसी हॉस्पिटल के लिए प्रयास किया जा रहा है सवाल यह है कि राज्य सरकार के आदेश को ईएसआईसी हॉस्पिटल क्यों नहीं मान रहा

मेदांता अस्पताल के साथ भी लगभग ऐसी ही स्थिति है। 2 दिन पहले यह खबर सामने आई थी की राजधानी पटना में बने नए मेदांता अस्पताल को भी कोविड-19 अस्पताल घोषित किया जा सकता है। लेकिन अभी तक इस पर बात नहीं बनी। बताया गया कि पहले योजना थी यहां 50 बिस्तर मरीजों के लिए रखे जाए। लेकिन अब कहां जा रहे हैं कि यहां मेदांता की टीम ही अस्पताल में काम शुरू करेगी इसमें खुद सीएम दिलचस्पी ले रहे हैं और इसके लिए मेदांता के डायरेक्टर नरेश त्रेहान से उन्होंने बात भी की है।

बिगड़ रहे हैं हालात

बिहार मे कोरोना मरीजों की आंकड़ों की बात करें तो सोमवार को 7487 नए संक्रमित मिले हैं। जिनमें सिर्फ राजधानी पटना में ही 24 घंटे में 26 से ज्यादा मामले मिले हैं, जबकि इस दौरान प्रदेश में 41 लोगों को बीमारी के कारण अपनी जान गंवानी पड़ी है

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