नाकाम सरकार! बिहार के पहले मुख्यमंत्री के नाम पर बना अस्पताल तीन साल बाद भी नहीं हो सका शुरू, शोभा की वस्तु बन कर रह गया है भवन

नाकाम सरकार! बिहार के पहले मुख्यमंत्री के नाम पर बना अस्पताल तीन साल बाद भी नहीं हो सका शुरू, शोभा की वस्तु बन कर रह गया है भवन

NAWADA : नवादा जिले का एक अस्पताल है जो लगभग 3 साल पहले से बनकर तैयार है, लेकिन उसका लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है।  जिले के खनवां गांव स्थित बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ श्री कृष्ण सिंह के ननिहाल में बना 40 बेड का अस्पताल शोभा का वस्तु बनकर रह गया है। जिसको लेकर अब यहां के लोगों में सरकार के काम को लेकर आक्रोश पनपने लगा है।

 यहां के ग्रामीणों ने कहा है कि कोविड-19 को लेकर हम लोग आंदोलन नहीं कर रहे हैं। जैसे ही बीमारी कम होती है हम लोग इस बार बड़े पैमाने पर बड़ा आंदोलन भी करेंगे।  श्री बाबू के नाम पर यहां का अस्पताल होना चाहिए और अस्पताल जो बना है लगभग 3 सालों से अस्पताल बनकर तैयार है। लेकिन अब तक चालू नहीं हुआ ना ही यहां पर कोई नर्स की बहाली हुई है ना ही कोई डॉक्टर की बहाली हुई है।  यहां की व्यवस्था बिल्कुल ही चरमरा गई है।स्वास्थ्य व्यवस्था की हालत ऐसी है कि हम लोगों को काफी दूर जाना पड़ता है। इलाज करवाने के लिए।

आपको बताते चलें कि लगभग 3 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। इस अस्पताल पर लेकिन आजतक यहाँ एक भी डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मी नहीं आएं हैं। बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह के जन्मस्थान खनवां गाँव में इस अस्पताल को बनाने के किए स्वंय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज से 6 वर्ष पहले ऐलान किया था। तीन साल में भवन भी तैयार कर दिया गया, लेकिन जैसा कि बिहार सरकार में नियम है कि सिर्फ निर्माण तक ही सरकार को मतलब होता है, उसके बाद तब तक उस ओर दोबारा नहीं देखते, जब तक कि उसमें कमाई का कोई विकल्प नजर नहीं आता. इस अस्पताल के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। कमीशन के खेल में भवन बनाने के बाद तीन सा से उसे ऐसे ही छोड़ दिया गया। श्री कृष्ण सिंह के नाम से बने अस्पताल के बारे में बताया गया कि बिहार के सीएम नीतीश कुमार के द्वारा ऑनलाइन के माध्यम से उनकी ही रजिस्टर में यहां की अस्पताल उद्घाटन है।  

केंद्रीय मंत्री ने गांव को लिया था गोद

 सबसे बड़ी बात तो यह है कि नवादा के पूर्व सांसद व वर्तमान में बेगूसराय से सांसद गिरिराज सिंह ने इस गांव को गोद लिए था।उन्होंने कई वादा किया लेकिन सभी वादा बिल्कुल ही फेल नजर आई। एक अस्पताल को भी चालू नहीं हो सकी।  बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री का सपना भी इन लोगों ने मिट्टी में धूल कर दिए हैं।  सिर्फ श्री बाबू के नाम पर राजनीति की जाती है। 



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