BIHAR NEWS: नीतीश का केवल एक तीर और सब हो गये चारों खाने चित्त, हमेशा बयान देने वालों ने भी साधी चुप्पी

BIHAR NEWS: नीतीश का केवल एक तीर और सब हो गये चारों खाने चित्त, हमेशा बयान देने वालों ने भी साधी चुप्पी

पटना: बिहार की राजनीति को अपने इर्द गिर्द घुमाने वाले नीतीश कुमार ने केवल एक दांव से यह साबित कर दिया कि अभी बिहार के महाराज वही हैं। पंद्रह सालों से भी ज्यादा वक्त तक सूबे की सियासत को अपने अनुसार आकार देने वाले नीतीश कुमार को समझना आसान नहीं है। जिस किसी ने भी नीतीश से टकराने की कोशिश की है, वक्त आने पर नीतीश ने इस कदर से उसका जवाब दिया है कि जिसकी सामने वाला कल्पना भी नहीं कर सकता। सूबे की सरकार में सहयोगी पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख व पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने कुछ दिन पहले राजद सुप्रीमो से बातें की थी तो बिहार की राजनीति में सुगबुगाहट का दौरा शुरू हो गया था लेकिन नीतीश कुमार की एक सधी चाल ने सारे चालों को फेल करते हुए पूरी बाजी को ही पलट दिया और अपने राजनैतिक विरोधियों को एक संदेश भी दे दिया है।

मांझी, सहनी भी हो गये चुप

कुछ ही दिन पहले राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के जन्मदिन पर लालू के बडे बेटे तेजप्रताप यादव अचानक जीतनराम मांझी के आवास पर चले गये थे और वहीं से लालू प्रसाद की जीतन राम मांझी से करीब 12 मिनट की टेलिफोनिक बात भी हुई। इस बातचीत पर मांझी ने कुछ नहीं कहा, उल्टे इसे हवा देते हुए वीआइपी के प्रमुख मुकेश सहनी ने कहा कि इसे पर्दे में ही रहने दीजिए। इसके बाद अल्पमत वाली नीतीश सरकार के भविष्य पर अटकलें लगनी शुरू हो गयी थी। जिसमें लालू प्रसाद का नाम भी प्रमुखता से आने लगा था। लेकिन नीतीश कुमार के एक चिरागी दांव ने सारे अटकलों, बयानों पर विराम लगा दिया। जैसे ही लोजपा के टूटने व टूटे हुए सांसदों का नीतीश कुमार के साथ खडे होने की बात सामने आयी, जीतनराम मांझी के सुर बदल गये और चिराग पर हमला करते हुए उन्होंने यहां तक कह दिया कि सीएम नीतीश के खिलाफ साजिश रचने वालों के साथ ऐसा ही होगा। पार्टी प्रवक्ता दानिश रिजवान ने कहा, जो लोग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ अनर्गल बात कहते हैं उनके लिए यह बड़ी सीख है। लोजपा की टूट ने बता दिया है कि नीतीश के खिलाफ साजिश रचने वाले सफल नहीं हो सकते हैं। उनका खुद का घर संभल नहीं सकता तो वो दूसरे की तरफ कभी भी पत्थर मार देते हैं। यानी नीतीश का तीर सटीक निशाने पर बैठा है और मांझी को यह समझ आ गया है कि नीतीश कुमार के खिलाफ जाना खतरे से खाली नहीं है। 

दिख रही है कांग्रेस की बेचैनी

एक तरफ जहां लोजपा टूट गयी वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी को लेकर भी सूबे में कई तरह की चर्चाएं हैं। जानकारों की माने तो कांग्रेस के 10 ऐसे विधायक हैं, जो कभी भी पाला बदल सकते हैं। ये सभी जेडीयू के लगातार संपर्क में हैं। हालांकि इसमें कितनी सच्चाई है यह कोई नहीं जानता लेकिन, कल तक नीतीश कुमार पर हमलावर रही कांग्रेस के सुर भी बदल गए और पार्टी प्रवक्ता प्रेमचंद् मिश्र सीएम नीतीश से कांग्रेस के रिश्ते की दुहाई देने लगे और दावा किया कि कांग्रेस एकजुट है। प्रेमचंद्र मिश्रा ने कहा कि एलजेपी को आपने तोड़ दिया, लेकिन कांग्रेस कोई एलजेपी है क्या? नीतीश कुमार कांग्रेस को नाराज कर देंगे क्या? नीतीश कुमार राजनीतिक व्यक्ति हैं वो कभी भी नहीं चाहेंगे कि कांग्रेस का दरवाजा उनके लिए बंद हो जाए। मिश्रा ने दावा किया कि बिहार में एनडीए की सरकार गिरने जा रही है और गठबंधन की सरकार बनेगी। लेकिन कांग्रेस नेता के कहने का अंदाज ही बता रहा है कि कांग्रेसी सीएम नीतश की अगली चाल से कितने डरे हुए हैं।

नीतीश की कांग्रेस पर क्यों है नजर?

बता दें कि बिहार में इस समय कांग्रेस के कुल 19 विधायक हैं और टूटने के लिए दो तिहाई विधायकों, किसी भी दल के लिए साथ आना जरूरी है। दलबदल कानून के प्रावधानों के तहत विधायकों के टूटने के लिए 13 की संख्या होना अनिवार्य है। इसके लिए जेडीयू की तरफ से अब 'ऑपरेशन कांग्रेस' चलाया जा रहा है। हालांकि यह अंजाम तक कब पहुंचेगा यह नहीं कहा जा सकता, लेकिन राजनीतिक सूत्रों के अनुसार इतना जरूर है कि सीएम नीतीश की नजर कांग्रेस पर है और आने वाले दिनों में इसके परिणाम भी आपके सामने होंगे। वहीं, मुकेश सहनी की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कल तक जो बिहार सरकार को पुराना वादा याद दिला रहे थे, विधायकों के ऐच्छिक कोष को खर्च करने की इजाजत देने की दलील दे रहे थे, वे नीतीश के ऑपरेशन चिराग के बाद चुप्पी साध गए। जाहिर है ऑपरेशन चिराग के एक ही तीर कई निशाने को एक साथ साध गए हैं और बिहार की संभावित सियासत को लेकर भी काफी कुछ इशारा कर रही है। 

सीटों का आंकडा कहता है बहुत कुछ

दरअसल बिहार की पूरी सियासत सीटों की संख्या में उलझी रहती है। सूबे की एनडीए सरकार के पास बहुमत से केवल पांच सीटें ही ज्यादा हैं। लेकिन दूसरी तरफ महागठबंधन 110 सीटों के साथ बहुमत से केवल 12 सीटों से दूर हैं। ओवैसी की पार्टी के पांच विधायक भी महागठबंधन की तरफ अपना रूझान दिखा चुके हैं। ऐसे में महागठबंधन के पास 115 सीटें हैं जो जादुई आंकडें से महज सात सीट ही दूर हैं। ऐसे में मांझी व सहनी के आठ विधायक महागठबंधन के लिए लॉटरी साबित हो सकते हैं लेकिन जानकारों का यहां तक कहना है कि राजद के भी कई विधायक जदयू के संपर्क में हैं। सियासत में यह कहना कोई आश्चर्च नहीं कि कभी भी कुछ भी संभव हो सकता है लेकिन यह भी तय है कि नीतीश कुमार की चुप रहने की और सधी राजनीति करने की काट फिलहाल किसी के पास नहीं है। नीतीश बोलने में नहीं सीधे करने में यकीन रखते हैं। अब इस चिरागी दांव ने नीतीश के विरोधियों को झटको तो जरूर दे ही दिया है।


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