BIHAR NEWS: राजद ने की राज्य सरकार से मांग, पूरी हो रघुवंश प्रसाद की अंतिम इच्छा

BIHAR NEWS: राजद ने की राज्य सरकार से मांग, पूरी हो रघुवंश प्रसाद की अंतिम इच्छा

पटना: राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने राज्य सरकार से पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ समाजवादी नेता डॉ रघुवंश प्रसाद सिंह के जन्मदिन (6 जून) के अवसर पर उन मांगों के संदर्भ में घोषणा करने की मांग की है, जिसे उन्होंने अपने स्वर्गवासी होने के पूर्व मुख्यमंत्री को सम्बोधित पत्र के माध्यम से किया था। राजद 

प्रवक्ता ने बताया कि आगामी छह जून को रघुवंश बाबू की 75 वीं जयंती है। गत 13 सितम्बर को उनका निधन हो गया था। जब रघुवंश बाबू को यह जानकारी हो गई कि वे अब कुछ हीं दिनों के मेहमान हैं तो मरणासन्न स्थिति में हीं 10 सितम्बर 2020 को उन्होंने मुख्यमंत्री को सम्बोधित करते हुए तीन पत्र और एक पत्र सिंचाई मंत्री को सम्बोधित करते हुए लिखा था। इन पत्रों के माध्यम से उन्होंने अपने उन इच्छओं को सरकार के सामने रखने का काम किया जिसके लिए वे प्रयासरत रहते हुये भी अपने जीवनकाल में पुरा नहीं कर सके थे।


 राजद प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री को लिखे पहले पत्र में उन्होंने मांग की थी कि स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रतिवर्ष 15 अगस्त और 26 जनवरी को वैशाली गढ पर सरकारी आयोजन किया जाये और राज्यपाल अथवा मुख्यमंत्री द्वारा झंडोतोलन किया जाये जैसे एकीकृत बिहार में पटना और रांची में झंडोतोलन की परम्परा थी। दूसरे पत्र में उन्होंने भगवान बुद्ध का भिक्षा-पात्र अफगानिस्तान से वैशाली मंगवाने की मांग की थी। मुख्यमंत्री को लिखे तीसरे पत्र में रघुवंश बाबू ने मनरेगा से आम किसानों को जोड़ने की मांग की थी। जिससे मजदूरों को काम भी मिलेगा और किसानों को मजदूर की उपलब्धता के साथ हीं आर्थिक बोझ भी हल्का होगा। 

सिंचाई मंत्री को सम्बोधित पत्र में रघुवंश बाबू ने समाजवादी विचारक और साहित्यकार रामवृक्ष बेनीपुरी के घर की सुरक्षा के लिए मुजफ्फरपुर के कटौंझा धार को दोनों तटबंधों के बीच लाने, मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज, मोतीपुर और वैशाली में गंडक नहर पर छोटा पुल बनाने, वैशाली जिले के महनार प्रखंड में मलमला नहर के दाहिने बांध का चौड़ीकरण कर सड़क बनाने और शाहपुर मे नहर में स्लूइस गेट लगवाने का आग्रह किया गया है। राजद प्रवक्ता ने कहा कि स्व डॉ रघुवंश प्रसाद सिंह द्वारा अपनी अन्तिम इच्छा के रूप में मुख्यमंत्री को सम्बोधित पत्रों के माध्यम से किये गये मांगों को यदि उनकी जयन्ती के अवसर पर सरकार द्वारा मान ली जाती है तो यह उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। 

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