BIHAR NEWS : गया विष्णुपद श्मशान घाट पर जब टूट गयी परम्परा, बेटी ने दी पिता की चिता को मुखाग्नि, सब की आंखे हुई नम

BIHAR NEWS : गया विष्णुपद श्मशान घाट पर जब टूट गयी परम्परा, बेटी ने दी पिता की चिता को मुखाग्नि, सब की आंखे हुई नम

गया: कोरोना के कहर ने न जाने कितने परिवारों पर दुखों का पहाड़ गिराया है। शादी से लेकर मृत्यु तक होने वाली रिवाजें ध्वस्त हो रही हैं। सामाजिक बदलाव देखा जा रहा है। सवाल है मरता क्या न करता। कई परिवारों में अभिभावक कोरोना के शिकार हो गए और बच्चे अनाथ हो गए तो कहीं बुजुर्ग बाप के कंधे पर जवान बेटे की अर्थी का दुखद नजारा भी देखने को मिल रहा है। शुक्रवार को गया के विष्णुपद श्मशान घाट पर वर्षों से चली आ रही बेटे द्वारा पिता की चिता के मुखाग्नि देने की परंपरा भी ध्वस्त हो गयी।

पुत्री ने दी पिता की चिता  चिता को मुखाग्नि

कोरोना के कहर से बिहार के गांव और शहर का त्राहिमाम कर रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि यह मानव समाज के लिए खतरे की घंटी है । लेकिन कई दफा मजबूरी में ही सही सामाजिक बदलाव का फैसला लेना पड़ता है। बाद में वहीं समाज को नया रास्ता भी दिखा देता है। कुछ ऐसा ही हुआ गया विष्णुपद के श्मशान घाट पर जब एक बेटी ने बेटे का फर्ज निभाते हुए अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। मृतक का नाम प्रभु नंदन प्रसाद मौर्य था। वे गया में एक शिक्षाविद के तौर पर जाने जाते थे। उनका निधन 13 मई को हो गया । अंतिम संस्कार का क्रिया बेटी स्पृहा सोनल ने की। 1969 से ही विद्या विकास विद्यालय के माध्यम से पूरे जिले में शिक्षा का अलख जगा रहे थे। 

ग्रीन फील्ड स्कूल के निदेशक

रघुनंदन प्रसाद मौर्य ने 1969 में विद्या विकास विद्यालय शुरू किया था जिसे 1992 में ग्रीन फील्ड इंग्लिश स्कूल के तौर पर सीबीएसई दिल्ली से मान्यता मिली। इसी स्कूल को 1996 में उन्होंने भूसूंडा के निकट स्थापित किया फिर प्लस टू की मान्यता मिली। रघुनंदन प्रसाद मौर्य के अचानक निधन से गया के शिक्षा जगत में शोक की लहर है।

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