Bihar : वित्तीय नियमावली के उल्लंघन के आरोप में विभागीय कार्यवाही झेल चुके पदाधिकारी पर सुशासन की सरकार क्यों है मेहरबान

Bihar : वित्तीय नियमावली के उल्लंघन के आरोप में विभागीय कार्यवाही झेल चुके पदाधिकारी पर सुशासन की सरकार क्यों है मेहरबान

PATNA : वित्तीय अनियमितता के आरोपित होने के उपरांत विभागीय कार्यवाही के बाद तीन वेतन वृद्धि पर रोक व निंदन के आरोपी पदाधिकारी पर सुशासन की सरकार खासा मेहरबान है. इस पदाधिकारी पर गम्भीर वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप लग चुके हैं । जिसके उपरांत बिहार सरकारी सेवक वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील नियमावली 2005 के नियम 14  के प्रावधानों के तहत दंड भी दिया गया था । उसके बावजूद महाशय पर विभाग की खासा मेहरबानी दिखते रहा है। वर्तमान में ये बतौर कार्यपालक पदाधिकारी डिहरी में पदस्थापित भी हैं । सूत्रों की माने तो इन्हें जल्द ही पटना के आस पास के सबसे महत्वपूर्ण नगर परिषद की जिम्मेवारी दी जा सकती है।

क्या था मामला,क्यों लगी वेतन वृद्धि पर रोक

 गौरतलब है कि श्री सुशील कुमार जब तत्कालीन नगर कार्यपालक पदाधिकारी नगर पंचायत शेरघाटी संप्रति नगर कार्यपालक पदाधिकारी नगर पंचायत बोध गया में पदस्थापित थे तब इन पर वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप लगे थे । जांच दल ने जांच के उपरांत सामग्रियों के क्रय में वित्तीय नियमावली का अनुपालन नहीं किया जाना , सामग्री की संख्या को निविदा में अंकित नहीं किया जाना , मदवार तीन कोटेशन प्राप्त नहीं करना , ईटेंडरिंग नहीं कराना , परिमाण विपत्र का 5% अग्रधन के रूप में नहीं लेना , प्राप्त सामग्री को भंडार पंजी में अंकित नहीं करना , निविदा का प्रकाशन सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा नहीं कराया जाना , तथा बीआईएस अप्रूव्ड कंपनी नहीं होते हुए भी मेसर्स प्रकाश इंटरप्राइजेज को कुल 1 करोड़ 54 लाख 40 हजार 402 रुपये मात्र भुगतान किए जाने का आरोप प्रतिवेदित किया था। 

गया के तत्कालीन जिलाधिकारी के जांच प्रतिवेदन में भी पाया गया था दोषी

इस मामले में गया जिले के तत्कालीन जिलाधिकारी ने अपर समाहर्ता गया से जांच करा कर प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया था । उक्त जांच प्रतिवेदन में भी सुशील कुमार बिहार नगर सेवा तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी शेरघाटी से मुख्य समाचार पत्रों में बिना पुनर्निविदा प्रकाशन तथा पूर्व निर्धारित दर पर एलइडी लाइट क्रय के संबंध में स्पष्टीकरण प्राप्त कर आवश्यक कार्रवाई की अनुशंसा की थी। इस मामले में आरोप पत्र संचालन पदाधिकारी के जांच प्रतिवेदन एवं श्री सुशील कुमार द्वारा समर्पित अभ्यावेदन के अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गई समीक्षा में पाया गया था कि श्री कुमार द्वारा पूर्व निविदा की दर पर 21 हजार 8 सौ 49 रुपए प्रति की दर से कुल 2 सौ एलईडी लाइट लगाने का आदेश दिया गया था । इस प्रकार कुल 43 लाख 69 हजार 8 सौ रुपये का क्रय बिना निविदा प्रक्रिया अपनाए किया गया। जो स्पष्ट तौर वित्तीय नियमावली का उल्लंघन था।

अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णय अनुसार श्री सुशील कुमार तत्कालीन नगर कार्यपालक पदाधिकारी नगर पंचायत शेरघाटी संप्रति नगर कार्यपालक पदाधिकारी नगर पंचायत बोधगया को वित्तीय नियमावली के उल्लंघन के मामले में बिहार सरकारी सेवक नियमावली 2005 के नियम 14 के तहत संचयी प्रभाव के बिना 3 वेतन वृद्धि पर रोक एवं निंदन का आरोप प्रतिवेदित किया गया ।

फिर भी मेहरबान है सरकार

इतना होने के बावजूद भ्र्ष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली  सुशासन की सरकार  सुशील कुमार पर खासा मेहरबान दिखती है । फिलहाल श्री सुशील कुमार नगर कार्यपालक पदाधिकारी के तौर पर डेहरी में पदस्थापित हैं । सूत्रों की माने तो सुशासन की सरकार एक बार फिर से मेहरबानी दिखाते हुए इन्हें पटना के पास ही एक नगर परिषद का प्रभार देने का मन बना चुकी है ।

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