BIHAR POLITICS : मांझी का मूड और महत्वकांक्षा अचानक क्यों मारने लगती है उछाल, क्या नीतीश सरकार को गिराने की कोशिश में हम सुप्रीमो, समझिये

BIHAR POLITICS : मांझी का मूड और महत्वकांक्षा अचानक क्यों मारने लगती है उछाल, क्या नीतीश सरकार को गिराने की कोशिश में हम सुप्रीमो, समझिये

PATNA : बिहार की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से जो एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहा है, तो वह नाम है हिन्दुस्तान आवाम मोर्चा के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी का है। बीते शुक्रवार को मांझी और तेज प्रताप की मुलाकात और फिर लालू प्रसाद से 12 मिनट की बात को लेकर नए सियासी समीकरण गढ़े जाने की चर्चा शुरू हो गई है। लेकिन इन सबके सवाल यह है क्या सच में जीतन राम मांझी नीतीश सरकार को गिराने की कोशिश में जुटे हैं। इसका जवाब मांझी के महात्वाकांक्षा वाली राजनीति में देखा जा सकता है। 

मांझी पिछले कुछ समय से लगातार सरकार के खिलाफ भी बयानबाजी करते हैं, फिर सरकार के समर्थन में बातें करते हैं। मांझी ने कभी यह नहीं कहा कि वह नीतीश कुमार की सरकार से अलग होने जा रहे हैं, लेकिन इसके साथ ही नीतीश कुमार को यह एहसास दिलाना भी नहीं भूलते हैं कि उनकी सरकार को बचाने के लिए हम की चार सीटें कितनी महत्वपूर्ण है। मांझी का यह विरोध उस समय से ज्यादा बढ़ गया जब उनकी जानकारी के बगैर राज्यपाल द्वारा विधान परिषद के लिए चुने गए 12 सदस्यों का चयन कर लिया गया। भाजपा और जदयू ने कहीं ने कहीं मांझी को यह एहसास दिलाने की कोशिश की कि उनके लिए मांझी कोई महत्व नहीं रखता है। यह बात मांझी के लिए अंह को चोट पहुंचानेवाली थी। देखा जा सकता है कि इसके बाद से मांझी ने सरकार के खिलाफ खुलकर बोलना शुरू कर दिया। ताकि नीतीश सरकार को बता सके कि उन्हें दरकिनार कर सरकार को चलाना संभव नहीं है। 

महागठबंधन से अलग होने के बाद नीतीश ने दिया था मौका

यहां इस बात को भी समझना जरुरी है कि विधानसभा चुनाव के पहले मांझी तेजस्वी को सीएम मानने को तैयार नहीं थे। साथ ही तेजस्वी से सीटों के बंटवारे को लेकर मतभेद था। मांझी को अपनी पार्टी बचा पाना भी मुश्किल नजर आ रहा था तब नीतीश कुमार उनके साथ खड़े हुए और उन्हें अपने कोटे से छह सीटें दीं। इनमें चार सीटों पर वह जीतने में भी कामयाब रहे। अब मांझी कभी यह नहीं चाहेंगे कि वह नीतीश के साथ किसी प्रकार का धोखा करें। लेकिन, यह भी जरुरी है कि नीतीश की सरपरस्ती से अलग वह अपनी पार्टी का अस्तित्व भी बनाए रखें। जिसमें अब वह कामयाब होते नजर आ रहे हैं। यही कारण है गठबंधन में रहने के बाद भी मांझी लगातार नीतीश सरकार पर सवाल उठाते हैं और सरकार की मजबूरी है कि वह उन्हें कुछ भी नहीं कह पाती। संभवतः मांझी यही चाहते थे। उम्मीद है कि आगे भी यही सिलसिला चलता रहे और मांझी सरकार को अस्थिर करने की कोशिश करते रहें।


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