बिहार के कृषि मंत्री को सीएम नीतीश के अधिकारियों पर भरोसा नहीं, साफ कह दिया कि इस बार वो नहीं बनाएंगे कृषि रोड मैप

बिहार के कृषि मंत्री को सीएम नीतीश के अधिकारियों पर भरोसा नहीं, साफ कह दिया कि इस बार वो नहीं बनाएंगे कृषि रोड मैप

PATNA : 17 साल से बिहार के मुख्यमंत्री जिस कृषि रोड मैप को लेकर बिहार की कृषि विकास की तारीफ करते हुए नहीं थकते थे। उसे महज डेढ़ माह पहले  बिहार के कृषि मंत्री बने सुधाकर सिंह ने सिरे से खारिज कर दिया है। पटना में आज कृषि मंत्री ने एक प्रेस कांफ्रेंस में साफ कह दिया कि इस बार का कृषि मैप बिहार के अधिकारी नहीं बनाएंगे। सुधाकर सिंह ने इस दौरान यह भी साफ कर दिया कि अब तक जो कृषि रोड मैप बनाए गए थे, उसमें कई प्रकार की खामियां थी। हालांकि सुधाकर सिंह ने नाम नहीं लिया, लेकिन एक तरह से उन्होंने यह बता दिया कि सीएम द्वारा अब तक जो कृषि रोड मैप बनाए गए थे, वो पूरी तरह के गलत और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देनेवाले रहे हैं। 

कृषि मंत्री ने कहा कि इस बार के कृषि रोड मैप को तैयार करने में बिहार के किसी अधिकारी को शामिल नहीं किया जाएगा। कृषि रोडमैप सही से नहीं काम किया है इसलिए खाद्यान्न का उत्पादन बिहार में कम हुआ है। यही कारण है कि इनकी जगह देश के लोकप्रिय कृषि विशेषज्ञों, पद्मश्री से सम्मानित जानकारों, कृषि वैज्ञानिकों तथा कृषि कारोबारी की सहायता ली जाएगी। क्योंकि यह अधिकारियों से बेहतर जानते हैं कि कृषि कार्य को कैसे बेहतर किया जा सकता है। इससे पहले यह सब नहीं होता था। इसलिए कृषि अधिकारियों में तब्दीली करना चाहता हूं और तब्दीली होगी तो और बेहतर कार्य होगा। चौथा कृषि रोड मैप बिहार के लिए बिहार के लिए नही  देश के लिए रोल मॉडल होगा।

कृषि मंडी की होगी वापसी

बिहार में नीतीश कुमार 2005 में मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने जो एक प्रमुख कार्य किया था कि बिहार में कृषि मंडी का अंत कर दिया गया। नीतीश कुमार अब तक अपने इस फैसले को किसानों के हित में क्रांतिकारी फैसला बताते रहे हैं। लेकिन, बिहार के नए कृषि मंत्री अब कृषि मंडी को फिर से वापस लाने की वकालत कर रहे हैं। सुधाकर सिंह ने बताया कि कृषि मंडी को हम फिर से वापस लाएंगे। इसके लिए कानून बनाने के लिए पत्र भी लिखा गया है। बिहार में सिर्फ अधिकारियों पर जो निर्भरता थी उसे कम की गई है।

भाजपा पर भी बरसे

सुधाकर सिंह इस दौरान अपने विभाग पर सवाल उठानेवाले भाजपा नेताओं पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि बिहार में 17 साल से कृषि विभाग उनके पास थे। वह बताएं कि बिहार में कृषि विभाग का इतना बुरा हाल कैसे हो गया है। 17 साल से बिहार में बीजेपी ने कृषि मंत्रालय को बर्बाद किया है। मुझे आए सिर्फ एक माह हुआ है। जिसके बाद मैंने स्थिति में बदलाव लाने की तैयारी शुरू कर दी है। किसानों को उर्वरक सही से मिले इसलिए उर्वरक विक्रेताओं और लाइसेंस के लिए नियमों में बदलाव किया जा रहा है। उर्वरक वितरण में गड़बड़ियों की जांच कर कार्रवाई की है।

बैठक में नहीं बुलाने पर दी सफाई

पिछले दिनों कैबिनेट मीटिंग में हुए विवाद के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रदेश में सुखाड़ की स्थिति को लेकर समीक्षा बैठक बुलाई थी, लेकिन इस बैठक में बिहार के कृषि मंत्री को नहीं बुलाया गया। जिस पर यह कहा गया कि नीतीश कुमार उनसे नाराज हैं, जिसके कारण बैठक में नहीं बुलाया गया। सुधाकर सिंह ने इन चर्चा को गलत बताया। उनका कहना था कि वो प्रदेश के मुखिया है, उन्हे हक है कि वह किसी भी विषय पर बैठक बुला सकते हैं। जहां तक मुझे नहीं बुलाने की बात है तो इसकी जरुरत नहीं रही होगी, इसलिए नहीं बुलााया। 


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