काहे का इंवेस्टर्स मीट ? यह तो लॉ एंड ऑर्डर मीट था, CM नीतीश उद्योगपतियों से हाथ उठवा रहे थे, मानो चुनावी रैली को संबोधित कर रहे हों

काहे का इंवेस्टर्स मीट ? यह तो लॉ एंड ऑर्डर मीट था, CM नीतीश उद्योगपतियों से हाथ उठवा रहे थे, मानो चुनावी रैली को संबोधित कर रहे हों

PATNA: बिहार में नई सरकार बनने के बाद नीतीश-तेजस्वी नौकरी से लेकर रोजगार और उद्योग की बातें कर रहे। एनडीए शासनकाल में जिनकी नियुक्ति हो गई थी या फिर चयन हुआ था, उन्हें भी ज्वाइनिंग लेटर देकर बताने की कोशिश जारी है कि नई सरकार आते ही सरकारी नौकरी की पिटारा खोल दिया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव खूब प्रचारित भी कर रहे हैं. चेहरा चमकाने के लिए जनता की कमाई का पैसा अखबारों और टीवी के विज्ञापन पर खर्च की जा रही है। बिहार इंवेस्टर्स मीट-2022 को लेकर भी अब सवाल खड़े होने लगे हैं. 

इंवेस्टर्स मीट नहीं बल्कि लॉ एंड ऑर्डर मीट

सीएम नीतीश और डिप्टी सीएम तेजस्वी की तरफ से 29 सितंबर को बिहार इंवेस्टर्स मीट-2022 का आयोजन किया गया. मीट में वही पुराने उद्योगपति शामिल हुए जो बिहार में इथेनॉल प्लांट व अन्य प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं. भले ही कार्यक्रम का नाम इंवेस्टर्स मीट रखा गया था,लेकिन उसमें मुख्य बातें लॉ एंड ऑर्डर की थी. बिहार में बदले राजनीतिक हालात में उद्योगपतियों में मन में सुरक्षा को लेकर कहीं न कहीं शंका है। कल के मीटिंग में अफसर से लेकर मुख्यमंत्री तक का भाषण सुरक्षा के इर्द-गिर्द की घूमते रही।  एक उद्योगपति ने सुरक्षा को लेकर मन के अंदर की टेंशन को लेकर अपनी बात भी रखी। इस पर बिहार बीजेपी ने सवाल उठाया है। भाजपा का कहना है कि ये कैसा इंवेस्टर्स मीट...जहां उद्योग लगाने पर कोई बात नहीं, कोई नया इंवेस्टर्स नहीं, बात सिर्फ सुरक्षा पर हुई। आखिर सीएम नीतीश कुमार बताना क्या चाहते थे, आखिर कौन सी नौबत आ गई, जिससे उन्हें सुरक्षा को लेकर इस तरह की बात करनी पड़ी. बिहार बीजेपी ने कहा है कि यह इंवेस्टर्स मीट नहीं बल्कि लॉ एंड ऑर्डर मीट था। 

नीतीश कुमार ने बिहार की प्रतिष्ठा गिराई 

बिहार बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में दल के वरिष्ठ नेता व पूर्व विधायक ई. मनोज शर्मा ने सीएम नीतीश कुमार के इंवेस्टर्स मीट-2022 की पोल खोल कर रख दी। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को यह बताना चाहिए कि उन्हें बार-बार सुरक्षा को लेकर क्यों आश्वस्त करना पड़ रहा था? इस मीट में पुरानी बातें ही क्यों दुहराई जा रही थी, इंवेस्टर्स मीट में कितने नये उद्योगपति आये थे। नीतीश कुमार को बार-बार डीएम-एसपी को आदेश देने की नौबत क्यों आन पड़ी थी। बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि दरअसल, नीतीश कुमार जो बातें कर रहे थे वो काम जब हमलोग सरकार में थे,तब बीजेपी कोटे के मंत्री शाहनवाज हुसैन के द्वारा की गई थी। जो सुधार हमारे मंत्री कर रहे थे, इस बारे में तो उन्होंने कोई जिक्र ही नहीं किया. उन्होंने जिक्र किया कि जो लोकल प्रोडक्ट है उसे सरकारी खरीद में रियायत दी जाएगी. क्या नीतीश कुमार को या नहीं बताना चाहिए था कि बीजेपी के प्रयास से ही इसे लाया गया था.

हाथ उठवा कर समर्थन मांग रहे थे नीतीश कुमार

मनोज शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने बिहार की प्रतिष्ठा धूमिल की है। वे मंच से निवेशकों से हाथ उठवा कर समर्थन मांगा रहे थे. ऐसा लगा कि वह किसी चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे. कभी नहीं लगा कि बिहार की दशा और दिशा सुधारने को लेकर बात हो रही थी. आखिर वह क्यों डीएम और एसपी को निर्देश दे रहे थे.किस बात का डर बताना चाह रहे थे?  हमारी नजरों में यह इन्वेस्टर मीट नहीं या लॉ एंड ऑर्डर मीट था. बिहार की प्रतिष्ठा धूमिल कर दी गई.



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