बिहार की चर्चित मुखिया रितु जायसवाल ने लिखा फेसबुक पर मार्मिक पोस्ट, आखिर क्यों?

बिहार की चर्चित मुखिया रितु जायसवाल ने लिखा फेसबुक पर मार्मिक पोस्ट, आखिर क्यों?

NEWS4NATION DESK: बिहार में पंचायती राज संस्थाओं में नीतीश सरकार ने पचास प्रतिशत का आरक्षण दिया है. इसका परिणाम है कि आज बिहार की कई पंचायतो में आज मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य और जिला पार्षद चुनकर सामने आई है. हालाँकि इसका एक दूसरा पक्ष भी सामने आता है कि बिहार में मुखिया पति, सरपंच पति का कल्चर देखने को मिलता है. हालाँकि कई महिलाएं ऐसी भी जो जनप्रतिनिधि चुने जाने के अपने फैसले खुद करती है. इसमें उनके पति या परिजनों का कोई हाथ नहीं होता है. 

रितु जयसवाल उन्हीं महिलाओं में से एक हैं. उनके पति अरुण कुमार जयसवाल 1995 बैच के आईएएस है. लेकिन रितु जयसवाल गाँव में रहकर उनका विकास करना चाहती थी. अपने पति के साथ रहकर अच्छी खासी जिंदगी व्यतीत कर सकती थी. लेकिन गाँव में आकर उन्होंने मुखिया का चुनाव लड़ने का फैसला किया. वे सीतामढ़ी के सिंघवाहिनी पंचायत की मुखिया चुनी गयी. मुखिया बनने के बाद रितु जयसवाल सुर्ख़ियों में आ गयी. अब उनका दावा है की उन्होंने लोगों के जीवन में रहन सहन को बेहतर बनाने के लिए बहुत कुछ किया. वे दावा करती है की देश में यदि किसी पंचायत में सबसे अधिक शौचालय बनाया गया तो वह उनका सिंघवाहिनी पंचायत है.    

हालाँकि लोगों के जीवन स्तर को बढाने के लिए काम करनेवाली रितु जयसवाल अब सिस्टम से परेशान हो चुकी है. उन्होंने अपनी भड़ास अपने फेसबुक पेज पर निकाली है. रितु जयसवाल लिखती हैं कि

न व्यथित हूँ न चिंतित हूँ, संसद की तरह स्थगित हो गई हूँ! दम घुटता है इस सिस्टम में. इस भ्रष्ट तंत्र की हकीकत को ले कर. भ्रष्ट तंत्र के चिंताजनक हालात पर 3 साल से अपने ज़ेहन में दबाए रखे मन की व्यथा आप से साझा करना चाहती हूँ. गाँव में काम करते करते पिछले 3 साल से तंत्र की निकम्मेपन की वजह से आये दिन सरकारी अस्पताल में हो रहे गरीबों की मौत पर, प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को शिक्षा से वंचित रखने पर, मनरेगा में मज़दूरों की हकमारी पर, आम जनता के राशन को अफसरों के साथ मिल कर खाने को ले कर, राजनैतिक अनैतिकता जैसे कई मुद्दों ने मेरे अंतर्मन को झकझोड़ रखा है. 

आज तक आपने हमारे पंचायत की अच्छाइयों को, हमारी उपलब्धियों को सुना और जाना है, पर आज आपको अपनी कमियों को बताऊँगी, अपने पंचायत की, प्रखण्ड कार्यालय की, अनुमण्डल कार्यालय की, जिला कार्यालय की दुर्दशा बताऊँगी. इस भ्रष्ट तंत्र की वजह से मैं जो रात दिन झेलती हूँ वो आप को बताऊँगी. भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा ऐसी है कि एक ईमानदार व्यक्ति इसमे घुटन महसूस करता है और कभी कभी आत्महत्या करने का विचार मन मे आने लगता है, पर वो कायरता है या कुछ कर्तव्यनिष्ठ लोगों का और परिवार का साथ है जो ऐसा करने से रोकता रहता है और यह संघर्ष की लौ जलती रहती है जो किसी भी दिन अचानक से बुझ सकती है. आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की नज़र अलग से रहती हीं है. 


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