'गंवार' साबित हुए बिहार के गुरूजी : 13 हजार 55 शिक्षकों ने दी परीक्षा लेकिन 12 हजार 634 हो गए फेल

'गंवार' साबित हुए बिहार के गुरूजी : 13 हजार 55 शिक्षकों ने दी परीक्षा लेकिन 12 हजार 634 हो गए फेल

पटना. बिहार के जिन शिक्षकों पर बच्चों की किस्मत संवारने का जिम्मा है वे गंवार साबित हो रहे हैं. यह साबित हुआ है शिक्षकों द्वारा दी गई एक परीक्षा से जिसमें करीब 95 फीसदी शिक्षक परीक्षा पास करने में असफल रहे. दरअसल, बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) ने उच्च माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक के पदों पर नियुक्ति के लिए 6421 पदों का परिणाम जारी कर दिया है. 

बीपीएससी द्वारा आयोजित परीक्षा में 13 हजार 55 अभ्यर्थी शिक्षक शामिल हुए थे. यानी तय मापदंडों के अनुरूप परीक्षा देने वाले सभी अभ्यर्थी शिक्षक ही थे. लेकिन जो परीक्षा परिणाम आया है वह बेहद चौंकाने वाला है. 13 हजार 55 अभ्यर्थी शिक्षक में से 12 हजार 634 फेल साबित हुए हैं. ऐसे में 6421 पदों का परिणाम जारी किया लेकिन अब न्यूनतम कटआफ के आधार पर सिर्फ 421 उम्मीदवारों को सफलता मिली है. यह परीक्षा बीते 31 मई को हुई थी.

बीपीएससी के संयुक्त सचिव सह परीक्षा नियंत्रक अमरेंद्र कुमार ने अधिसूचना जारी कर दी है. उन्होंने बताया कि लिखित परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों का परिणाम जारी कर दिया गया है. उम्मीदवार आयोग की वेबसाइट www.bpsc.bih.nic.in पर मार्क्‍स शीट कालम से डाउनलोड कर सकते है.। इसमें उम्मीदवार अपना अनुक्रमांक एवं जन्म तिथि या रजिस्ट्रेशन नंबर व जन्म तिथि डालकर डाउनलोड कर सकते हैं.

हालांकि अब परीक्षा परिणाम आने के बाद बिहार के किस प्रकार की शिक्षा व्यवस्था है और शिक्षकों की गुणवत्ता क्या है उस पर भी सवाल उठ रहा है. खासकर सोशल मीडिया पर अब लोग इसे लेकर कई प्रकार के मीम बनाकर पूछ रहे हैं कि आखिर ऐसे शिक्षक जिनमें 95 फीसदी अभ्यर्थी असफ़ल हो गए हों वे किस प्रकार की शैक्षणिक गुणवत्ता वाले होंगे. 


आयोग की ओर से आयोजित 150 अंकों की वस्तुनिष्ठ परीक्षा के आधार पर मेधा सूची तैयार कराई गई. लेकिन इसमें सिर्फ 421 उम्मीदवारों का चयन हुआ. इसमें सामान्य वर्ग के 99, अनुसूचित जाति के 21, अनुसूचित जनजाति के एक, अत्यंत पिछड़ा वर्ग के 103 एवं पिछड़ा वर्ग के 140 उम्मीदवार शामिल हैं. इसमें सामान्य श्रेणी का कटआफ 48 रहा है. 

दरअसल, बिहार में ज्यादातर स्कूल कई साल से बगैर हेडमास्टर के चल रहे हैं. स्कूलों को किसी शिक्षक को प्रभारी बनाकर चलाया जा रहा है. राज्य सरकार ने पिछले साल तय किया था कि प्राइमरी स्कूल में हेड टीचर और हाई स्कूल में हेडमास्टर का एक अलग कैडर बनाकर प्रतियोगी परीक्षा के जरिए उनकी बहाली की जाएगी. सरकार की मंशा थी कि इससे शिक्षा का स्तर उठेगा और स्कूल प्रशासन बेहतर होगा. सरकार चाहती थी कि मेधावी शिक्षक इस रास्ते आगे बढ़ें. लेकिन हेडमास्टर परीक्षा का रिजल्ट बिहार की बदहाल शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल रहा है. 


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