बिहार सरकार के लिए धान खरीदी का लक्ष्य हासिल करना बना चुनौती, 30 लाख टन है लक्ष्य, लेकिन कभी तय आंकड़े नहीं छूए

बिहार सरकार के लिए धान खरीदी का लक्ष्य हासिल करना बना चुनौती, 30 लाख टन है लक्ष्य, लेकिन कभी तय आंकड़े नहीं छूए

पटना... सरकार पिछले कुछ वर्षों से 30 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य तय करती है, लेकिन वास्तविक खरीद 20 लाख टन से अधिक कभी नहीं हो पा रही है। बिहार सरकार की सभी कोशिशों के बावजूद इस बार भी धान खरीद के लक्ष्य के करीब पहुंचना सहकारिता विभाग के लिए बड़ी चुनौती होगी। राज्य में धान की सरकारी खरीद का आंकड़ा बढ़ नहीं रहा है।  हालांकि सरकार का यह लक्ष्य सांकेतिक होता है। अब खरीद गति से अंदाजा लगेगा कि कितने किसान से कितना धान इस बार सरकार खरीद सकेगी। 

राज्य में धान खरीद की प्रक्रिया एक सप्ताह में शुरू हो जाएगी। इसके लिए अब तक 51 हजार किसानों ने निबंधन करा लिया है। निबंधन की प्रक्रिया धान खरीद के अंत तक चलती रहेगी। धान खरीद की दर में इस बार 53 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। पिछले साल के 1815 रुपये प्रति क्विंटल के मुकाबले इस बार साधारण धान की कीमत 1868 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है।  

राज्य में धान की सरकारी खरीद 15 नवम्बर से ही शुरू हो जाती है। यह अभियान 30 मार्च तक चलता है। लेकिन, इस वर्ष चुनाव के कारण इसमें थोड़ी देर हुई है। हालांकि, पुरजोर खरीद हर साल दिसम्बर के बाद से ही शुरू होती है। लिहाजा उस हिसाब से किसानों में इसको लेकर बहुत चिंता नहीं है। 

किसानों में असली परेशानी नमी को लेकर होगी। सरकार 17 प्रतिशत तक नमी वाला धान ही खरीदती है। नमी का प्रतिशत यहां तक फरवरी के पहले नहीं आता है। अभी जहां धान की कटनी हो गई है, वहां नमी 20 प्रतिशत से कम नहीं होगी। सरकार नमी में छूट की मांग तो केन्द्र से हर साल करती है, लेकिन दो प्रतिशत छूट देने का आदेश जब तक केन्द्र से आता है तब तक धान पूरा सूख जाता है और नमी खुद ही कम हो जाती है। 


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