इस्मत चुगताई, जिनकी कलम में थी इतनी ताकत की लिख डाली पहली लेस्बियन प्रेम कहानी

इस्मत चुगताई, जिनकी कलम में थी इतनी ताकत की लिख डाली पहली लेस्बियन प्रेम कहानी

N4N Desk: गूगल डूडल आज प्रसिद्ध फिक्शन लेखिका इस्मत चुगताई को याद किया है. आज इस्मत चुगताई का 107वां जन्मदिन है. इस्मत चुगताई अपनी कलम की ताकत से महिलाओं की आवाज़ बनी. कलम की ताकत जो इन्होंने दिखाई उसके उन्हें कोर्ट-कचहरी के चक्कर भी काटने पड़े. इस्मत ने अपनी कहानियों में समाज और समाज में हो रहे महिलाओं पर अत्याचार को बखूबी शब्दों में सजाया है.

उत्तर प्रदेश में जन्मीं चुगताई अपने 10 भाई बहनों में नौंवी संतान थीं और उन्होंने कम उम्र में ही लिखना शुरू कर दिया था. उन्होंने अपने बड़े भाई मिर्जा अजीम बेग चुगताई से प्रभावित होकर लिखना शुरू किया था. उन्होंने महिला सेक्सुलिटी और फेमिनिटी, मध्यम वर्ग की सभ्यता और वर्ग संघर्ष विषयों पर कई कहानी और लेख लिखे.

इस्मत चुगताई की चर्चित विवादित कहानी है लिहाफ. कहानी के संवाद को इस्मत चुगताई ने बखूबी लिखा. हालांकि 1942 में जब यह कहानी अदाब-ए-लतीफ में पहली बार छपी तो इस्मत को कोर्ट केस भी लड़ना पड़ा. इस कोर्ट केस में इस्मत की जीत हुई थी. लिहाफ को हिंदुस्तानी साहित्य में लेस्बियन प्यार की पहली कहानी माना जाता है और इस कहानी ने इतिहास रच दिया।

महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर लिखने के साथ ही उन्होंने बॉलीवुड में भी काम किया. फिल्म जगत में उन्हें फिल्म आरजू, फरैब, सोने की चिड़िया आदि के लिए जाना जाता है. उर्दू साहित्य में सआदत हसन मंटो, इस्मत, कृष्ण चंदर और राजेन्दर सिंह बेदी को कहानी के चार स्तंभ माना जाता है. 24 अक्टूबर, 1991 को उनका निधन हुआ.

इस्मत आपा ने यूँ तो बहुत सी कहानियां लिखी है लेकिन उनकी कुछ प्रसिद्ध कहानियां है- चोटें, छुईमुई, एक बात, कलियां, एक रात, शैतान, टेढी लकीर, जिद्दी, दिल की दुनिया, मासूमा, सैदाई, कागजी हैं पैराहन आदि.


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