भाजपा-जदयू रहेंगे साथ तभी बनेगी बात,जब-जब मिलकर ठोकी ताल,कर दिया दूसरे दलों का बुरा हाल

भाजपा-जदयू रहेंगे साथ तभी बनेगी बात,जब-जब मिलकर ठोकी ताल,कर दिया दूसरे दलों का बुरा हाल

PATNA : बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद भी एनडीए में सीट शेयरिंग का मामला पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है. लेकिन अगर आंकड़ों की बात करे तो बीजेपी और जदयू जब भी साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरे हैं दोनों पार्टियों ने चुनावी मैदान पर कब्जा ही किया है.

एनडीए के दोनों दलो को बिहार की जनता सिर आंखों पर बैठाती है लेकिन इस चुनाव में जनता एनडीए या महागठबंधन किस पर भरोसा करती है ये तो आना वाला वक्त ही बताएगा लेकिन विधानसभा चुनाव आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं जब ये दोनों दल साथ लड़े तो वोट प्रतिशत हर बार बढ़ता चला गया. जदयू का साथ मिलने से 2005 के फरवरी में हुए बिहार विधानसभा चुनाव से ही भारतीय जनता पार्टी भी वोट प्रतिशत में इजाफा होना शुरू हो गया वहीं दूसरी तरफ जदयू का भी वो पर्सेंटेज भी बढ़ा.


थोड़ इतिहास में जाएं तो 1994 में जनता दल (जे) समता पार्टी बना था. 1996 के लोकसभा चुनाव से भाजपा और जदयू का बिहार में गठबंधन हुआ.  साल 2000 में हुए विधानसभा चुनाव में दोनों दल पहली बार साथ उतरे. उसके बाद हर चुनाव में दोनों ही दलों को बिहार की जनता को नेह-स्नेह मिलता रहा और दोनों दलो ने बिहार की सियासत में अपनी पकड़ मजबूत कर ली.2000 के विधानसभा चुनाव में जदयू ने 34 सीटें जीतीं. उस वक्त जदयू ने 120 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे. वहीं बीजेपी ने 67 सीटों पर कब्जा जमाया था. 

साल 2005 के चुनाव में जदयू ने 138 सीटों पर दावेदारी की थी और 57 सीटों पर जीत दर्ज किया था. जबकि बीजेपी ने 37 सीट पर जीत दर्ज की थी. जबकि 2005 में ही अक्टूबर में हुए चुनाव में जदयू ने 139 सीटों पर लड़कर 88 सीटों पर कब्जा किया था, वहीं बीजेपी ने 55 सीटों पर कब्जा जमाया था. वहीं 2010 में जदूय 141 सीटों पर चुनाव लड़ा और 115 सीट पर कब्जा जमाया जबकि 102 सीटों पर बीजेपी ने कैंडिडेट उतारा था और 91 सीटों पर जीत दर्ज की थी. अब देखना है कि इस बार के चुनाव में एनडीए बिहार की जनता का दिल जीत पाती है या नहीं.

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