BJP ने तेजस्वी का उड़ाया मजाक,कहा- मानव श्रृंखला में सिर्फ 'मानव' की ही कमी रह गई जिस कारण श्रृंखला नहीं बनी

BJP ने तेजस्वी का उड़ाया मजाक,कहा- मानव श्रृंखला में सिर्फ 'मानव' की ही कमी रह गई जिस कारण श्रृंखला नहीं बनी

PATNA: किसानों के मुद्दे पर राजद की तरफ से आज मानव श्रृंखला है। तेजस्वी यादव की अगुवाई में पूरे बिहार में मानव श्रृंखला आयोजित की गई है। इस ह्यूमन चेन में महागठबंधन के सहयोगी दल के नेता भी शिरकत कर रहे हैं। RJD के मानव श्रृंखला पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तंज कसा है। उन्होंने कहा है कि चलिए अब तो ये लोग भी मानने लगे न मानव श्रृंखला का महत्व।इधर, भाजपा नेता व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने तेजस्वी यादव की मानव श्रृंखला का मजाक उडाया है।

बीजेपी का तेजस्वी पर बड़ा अटैक

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने तंज कसते हुए कहा कि तेजस्वी जी आपके मानव श्रृंखला में बस मानव की कमी रह गई जिसके कारण श्रृंखला नहीं बनी.मतलब बीजेपी ने मानव श्रृंखला को पूरी तरह से फेल बता दिया है। वहीं बीजेपी के प्रवक्ता अखिलेश सिंह ने भी मानव श्रृंखला को पूरी तरह फेल बताया है। उन्होंने कहा कि किसानों के  मुद्दे पर विपक्ष द्वारा आयोजित मानव श्रृंखला हो गया है । बिहार और पूर्वी चंपारण जिले के किसानों ने इस आंदोलन को पूरी तरह नकार दिया । इस आंदोलन में राष्ट्रीय जनता दल और कुछ राजनीतिक दलों के इक्के दुक्के कार्यकर्ता नजर आए किसान कहीं भी नहीं थे। किसानों ने अपने समर्थन से केंद्र और राज्य में एनडीए की सरकार बनाई है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना पूर्ण समर्थन दिया है, आज भी किसानों का विश्वास एनडीए में कायम है ।

सीएम नीतीश बोले-अब ये लोग भी मानव श्रृंखला का महत्व समझने लगे 

महात्मा गांधी की पुण्य तिथि पर गांधी घाट पर आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजद की मानव श्रृंखला पर तंज कसते हुए कहा कि अब ये लोग भी मानव श्रृंखला का महत्व समझने लगे न....। सबसे पहले हमलोगों ने मानव श्रृंखला की शुरूआत की। सबसे पहले हमलोगों ने शराबबंदी पर मानव श्रृंखला का दूसरी दफे दहेज प्रथा- बाल विवाह और तीसरी बार जल-जीवन-हरियाली को लेकर मानव श्रृंखला बनाई। सीएम नीतीश ने कहा कि सबसो मानव श्रृंखला बनाने का अधिकार है।...कोई बात नहीं है। 

लाल किले पर हुए उपद्रव से सीएम नीतीश चिंतित

मुख्यमंत्री ने 26 जनवरी कतो लाल किले पर हुए उपद्रव की कड़ी निंदा की और कहा कि विरोध का ये तरीका उचित नहीं है। इसकी जितनी निंदा की जाए वो कम है। मांग मनवाने का ये तरीका कतई उचित नहीं कहा जा सकता। 

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