बीजेपी ने 'भूमिहार' जाति से मोड़ लिया मुंह? अबतक एक उम्मीदवार का भी टिकट कन्फर्म नहीं

PATNA : बिहार में 'भूमिहार' जाति को बीजेपी का परंपरागत समर्थक माना जाता है। कांग्रेस के स्वर्णिम काल में उसके साथ खड़ी रहने वाली 'भूमिहार' जाति के बारे में सियासी जानकार मानते हैं कि लालू यादव के राजनीतिक उदय के साथ ही 'भूमिहार' जाति के लिए बीजेपी के अलावे कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा। 

खुद बीजेपी नेतृत्व भी इस बात को भली-भांति समझता है कि 'भूमिहार' उसे छोड़कर कहीं और नहीं जा सकता। लेकिन बिहार में बीजेपी को जिन 17 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारने जा रही है उन संभावितों में अबतक 'भूमिहार' जाति से आने वाले किसी कैंडिडेट का नाम नहीं दिख रहा। इस जाति से आने वाले इकलौते सांसद गिरिराज सिंह की नवादा लोकसभा सीट एलजेपी के पाले में जा चुकी है। गिरिराज सिंह को बीजेपी बेगूसराय भेजना तो चाहती है लेकिन सूत्रों के मुताबिक वह खुद इसके लिए तैयार नहीं। 

ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा की बीजेपी का अपने समर्थक माने जाने वाली 'भूमिहार' जाति से मोहभंग हो गया दिखता है। 17 में से एक भी सीट पर 'भूमिहार' जाति की हिस्सेदारी कंफर्म नहीं करने के बावजूद बीजेपी इसलिए भी आराम की मुद्रा में क्योंकि उसे यह बात अच्छे से मालूम है कि इस जाति के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं।

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