डैमेज कंट्रोल की कोशिशः BJP अध्यक्ष संजय जायसवाल ने 'साहित्यकार' दया प्रकाश सिन्हा के खिलाफ दर्ज कराया केस, जानें मामला...

डैमेज कंट्रोल की कोशिशः BJP अध्यक्ष संजय जायसवाल ने 'साहित्यकार' दया प्रकाश सिन्हा के खिलाफ दर्ज कराया केस, जानें मामला...

पटनाः सम्राट अशोक की तुलना औरंगजेब से करने पर बिहार की राजनीति गरम है। जेडीयू ने साहित्यकार को बीजेपी का नेता बताते हुए कार्रवाई की मांग की। साथ पीएम मोदी से पुरस्कार वापस लेने को लेकर अभियान छेड़ दिया है। जेडीयू राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह एवं उपेन्द्र कुशवाहा लगातार लेखक दया प्रकाश सिन्हा के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। बिहार बीजेपी अध्यक्ष ने बुधवार को बिना नाम लिये जेडीयू नेताओं पर जरूर हमला बोला लेकिन आज उन्होंने सम्राट अशोक को औरंगजेब से तुलना करने वाले साहित्यकार दया प्रकाश सिन्हा के खिलाफ केस दर्ज करा दिया है। 

कोतवाली थाने में केस 

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर संजय जयसवाल ने साहित्यकार दया प्रकाश सिन्हा के खिलाफ केस दर्ज कराया है. संजय जायसवाल ने पटना के कोतवाली थाने में साहित्यकार के खिलाफ एक खास समुदाय की भावना आहत करने का आरोप लगाते हुए केस कराया है. बीजेपी अध्यक्ष ने थानाध्यक्ष से आईपीसी की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज करने को कहा है. 

दया प्रकाश सिन्हा गलत जानकारी दे रहे-बीजेपी

बीजेपी अध्यक्ष संजय जायसवाल ने थाने में दिये आवेदन में लिखा है कि दया प्रकाश सिन्हा ने सम्राट अशोक पर एक किताब लिखी है. उन्होंने सम्राट अशोक की तुलना औरंगजेब से की है. अपने विकीपीडिया पेज पर दया प्रकाश सिन्हा अपने आप को बीजेपी कल्चरल सेल का नेशनल कन्वेनर और इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस का उपाध्यक्ष बता रहे हैं। संजय जायसवाल ने अपने पत्र में कहा है कि दया प्रकाश सिन्हा ने बीजेपी कल्चरल सेल के राष्ट्रीय संयोजक की जो बात कही है वह पूरी तरीके से गलत है. वह बीजेपी कल्चरल सेल को लेकर पूरी तरीके से गलत सूचना दी है .इससे बीजेपी की प्रतिष्ठा धूमिल हुई है. ऐसे में दया प्रकाश सिन्हा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाय।

गौरतलब है कि वरिष्ठ नाटककार सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी दया प्रकाश सिन्हा को पद्मश्री पुरस्कार प्रदान किया गया है। दया प्रकाश का पिछले साल 15 नाटकों का संकलन नाट्य समग्र के नाम से प्रकाशित हुआ है। वरिष्ठ नाटककार दया प्रकाश सिन्हा डायरेक्टर कल्चरल अफेयर्स के पद से वे 1993 में सेवानिवृत्त हुए थे। हिंदी संस्थान के निदेशक की भूमिका भी निभायी। नाट्य लेखन, निर्देशन, अभिनय हर विधा को निभाया।


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