BJP ने 'आरक्षण' पर ललन सिंह को घेरा, पूछा- आपने NDA सरकार की 'आरक्षण' नीति का विरोध किया था, क्या अब भी उसपर कायम हैं?

BJP ने 'आरक्षण' पर ललन सिंह को घेरा, पूछा- आपने NDA सरकार की 'आरक्षण' नीति का विरोध किया था, क्या अब भी उसपर कायम हैं?

PATNA: बिहार में बीजेपी और जेडीयू आमने-सामने है। दोनों दल के नेताओं का एक-दूसरे पर जुबानी हमला जारी है। मणिपुर में जेडीयू के पांच विधायकों को भाजपा ने तोड़कर अपने दल में मिला लिया। इसके बाद जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आगबबूला हो गय़े हैं. इधर भाजपा द्वारा लगातार ललन सिंह और नीतीश कुमार पर हमला जारी है। बीजेपी ने ललन सिंह पर सीधा प्रहार किया है। भाजपा ने पूछा है कि आप तो एनडीए सरकार की पंचायती आरक्षण नीति का विरोध किया था? क्य़ा आप आरक्षण विरोध की नीति पर कायम हैं?  

तब पंचायती आरक्षण नीति का विरोध किया था क्या अब भी कायम हैं?-बीजेपी 

JDU के वर्तमान राष्ट्रीय राष्ट्रीय अध्यक्ष तब नीतीश कुमार से नाराज चल रहे थे। ललन सिंह तब सीएम नीतीश कुमार का खुल्लमखुल्ला विरोध करते थे। एक इंटरव्यू में ललन सिंह ने नीतीश कुमार की आरक्षण नीति पर सवाल खड़े किये थे। अखबार में ललन सिंह की छपी इंटरव्यू को आधार बनाकर भारतीय जनता पार्टी ने जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष पर प्रहार किया है। बिहार बीजेपी के प्रवक्ता डॉ. निखिल आनंद ने ललन सिंह से पूछा है कि आदरणीय ललन सिंह जी! पान-गुटखा चबाते हैं पर कही गई बात थोड़े ही खा-पचा सकते हैं। आप सितंबर 2010 में अखबार के इंटरव्यू में आपने सत्य कहा, "जदयू एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है!" इंटरव्यू में आपने एनडीए सरकार की पंचायती आरक्षण नीति का विरोध किया, क्या आरक्षण विरोध की नीति पर कायम हैं?

तब नीतीश कुमार पर ललन सिंह ने किया था प्रहार  

बीजेपी ने 2010 में अखबार में प्रकाशित इंटरव्यू को सार्वजनिक किया है।अखबार में  आलोक चंद्र से बातचीत में उन्होंने शरद यादव से लेकर नीतीश कुमार तक पर हमला बोला था. जेडीयू को एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी करार दिया था. साथ ही कहा था कि नीतीश सरकार जब से सत्ता में आई है तनाव ही पैदा किया है. सबसे पहले पंचायतों में आरक्षण देकर. लोग धैर्य के कारण सड़कों पर नहीं आए. समय का इंतजार कर रहे थे. इंटरव्यू में आगे कहा गया है कि हम मुख्यमंत्री से उनकी राजनीतिक नियुक्तियों के बारे में जानना चाहते हैं .5 सालों में उन्होंने कितनी राजनीतिक नियुक्तियां की हैं ....उसे जारी कीजिए. पोल खुल जाएगी. किरानी को मैथिली एकेडमी का अध्यक्ष बना दिया. किसका कितना हित कर रहे हैं, मैथिली को देख लीजिए. हिंदी ग्रंथ अकादमी, संस्कृत शिक्षा बोर्ड, नागरिक परिषद और मेला प्राधिकार में किसे स्थान दिया?  अगर एक ही समाज का भला चाहते हैं तो उस समाज के कार्यकर्ताओं को स्थान देते.

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