चरम पर अफसरशाही ! CM नीतीश के मंत्री के आदेश को उनके ही विभाग के एक अधिकारी ने नहीं माना, मिला लघु दंड
PATNA: बिहार में अफसरशाही इस कदर हावी है कि विभागीय मंत्री के आदेश को भी अफसर ठेंगा दिखाते हैं. समाज कल्याण विभाग के मंत्री मदन सहनी ने 2023 में ही विभाग के उप सचिव हरिशंकर राम को दो मामलों की जांच के आदेश दिए थे. लेकिन अफसर ने मंत्री के आदेश पर जांच कर रिपोर्ट नहीं दिया. कई अन्य आरोपों में बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हरिशंकर राम के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू की गई. अब सरकार ने दंड दिया है.
बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हरिशंकर राम को दंड दिया गया है. इस संबंध में सामान्य प्रशासनिक विभाग की तरफ से 5 अप्रैल को संकल्प जारी किया है.बिहार प्रशासनिक सेवा के हरिशंकर राम समाज कल्याण विभाग में ही उपसचिव के पद पर हैं . इनके खिलाफ विभाग ने 28 नवंबर 2023 को आरोप पत्र गठित कर सामान्य प्रशासन विभाग को उपलब्ध कराया था. आरोप है कि 19 अप्रैल 2023 को इन्होंने जिला प्रोग्राम पदाधिकारी का कार्यालय अररिया एवं किशनगंज तथा बाल विकास परियोजना कार्यालय टेढ़ागाछी, बहादुरगंज, ठाकुरगंज में किए गए निरीक्षण के संबंध में 13 लोगों ने शिकायत की थी. जिसमें आंगनबाड़ी केंद्रों के निरीक्षण में लाखों रुपए की अवैध वसूली का आरोप लगा था. इसके साथ ही अय्याशी करने की भी शिकायत की गई थी. हालांकि आईसीडीएस के निदेशक के जांच प्रतिवेदन में अवैध वसूली एवं अय्याशी से संबंधित कोई साक्ष्य प्राप्त नहीं हुआ. लेकिन निदेशक के जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट किया गया कि दो दिनों तक किशनगंज में रहने के बाद भी इन्होंने जिला प्रोग्राम कार्यालय किशनगंज का निरीक्षण नहीं किया.यह विभागीय आदेश की अवहेलना है.
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा गठित आरोप पत्र, जांच प्रतिवेदन एवं आरोपी अधिकारी के स्पष्टीकरण से पता चलता है कि उन्होंने दायित्व का निर्वहन नहीं किया. इसके साथ ही समाज कल्याण विभाग के मंत्री द्वारा निदेशित दो मामलों का जांच प्रतिवेदन ससमय समर्पित नहीं किया. साथ ही सभी परियोजना की जांच भी नहीं की. ऐसे में आरोपी अधिकारी हरिशंकर राम उप सचिव समाज कल्याण विभाग के खिलाफ वर्ष 2023-24 में निंदन एवं एक वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोक का दंड लगाया गया है.