बिहार विधानसभा का शताब्दी समारोह : चार मिनट के भाषण में पांच बार अटके तेजस्वी, होने लगी चर्चा

बिहार विधानसभा का शताब्दी समारोह : चार मिनट के भाषण में पांच बार अटके तेजस्वी, होने लगी चर्चा

पटना. बिहार विधानसभा भवन के शताब्दी वर्ष समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पटना पहुंचे। इस दौरान सीएम नीतीश कुमार, विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव समेत मंत्री और विधायक मौजूद रहे। इस कार्यक्रम में तेजस्वी ने चार मिनट भाषण दिया। इस दौरान तेजस्वी पांच बार अटके। अपने भाषण में तेजस्वी यादव ने पीएम से बिहार के लिए दो मांग की। उन्होंने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने बिहार में स्कूल ऑफ डेमोक्रेसी एंड लेजिस्लेटिव स्टडी स्थापित करने की मांग की।

अपने भाषण में तेजस्वी ने कहा कि बिहार लोकतंत्र की जननी है अतः यहां से एक संदेश पूरे देश में जाना चाहिए। हम अलग-अलग दलों से इस विधानमंडल में है, लेकिन हमारी वैचारिक प्रतिस्पर्धा राजनीतिक शत्रुता में नहीं बदलनी चाहिए। समाज के हर वर्ग की आबादी के अनुसार भागीदारी और हिस्सेदारी से ही लोकतंत्र समृद्ध और समावेशी होगा।

उन्होंने कहा कि मैं पीएम से आग्रह करता हूं कि स्कूल ऑफ डेमोक्रेसी एंड लेजिस्लेटिव स्टडी जैसी एक संस्था बिहार में स्थापित हो। इसके माध्यम से विधायी और लोकतंत्र के विभिन्न पहलुओं पर शोध एवं अध्ययन के अवसर और प्रशिक्षण दिया जा सके। पूरे देश के जनप्रतिनिधियों, युवाओं और संबंधित कर्मचारियों को इससे लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि आशा है कि पीएम हमारी इस मांग पर गंभीर तापूर्वक विचार करेंगे।

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने डिजर्विंग और विशेषज्ञ व्यक्तियों को पद्मश्री पद्म विभूषण इत्यादि सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार देने की एक स्वस्थ एवं सकारात्मक परंपरा स्थापित की है। इसी प्रांगण में हम जननायक कर्पूरी ठाकुर की आदमक़द प्रतिमा के बगल में बैठे है। हमारी मांग है कि जननायक कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देकर इस शताब्दी वर्ष समारोह एवं देश के किसी भी प्रधानमंत्री के बिहार विधानसभा प्रांगण में प्रथम आगमन को और अधिक यादगार बनाने की कृप्या करें। यहां उपस्थित हरेक माननीय सदस्य की यह हार्दिक इच्छा है कि जननायक कर्पूरी ठाकुर जी को अवश्य ही भारत रत्न मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के समक्ष कई चुनौतियां हैं, लेकिन हम सामूहिक प्रयास और संकल्प से जनतंत्र को धनतंत्र और छलतंत्र से बचा सकते हैं। हमारे पुरखों ने हमें लोकतंत्र की समृद्ध विरासत सौंपी। आवश्यकता है कि हम सब मिलकर विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की जड़ों को और मजबूत करें। विधानसभा के शताब्दी वर्ष में यही चुनौती भी है और अवसर भी है।

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