कुर्सी में बाधक बने ‘पत्थर’ को हटाने के लिए हाकिमों ने भ्रष्टाचार की गंगोत्री में जमकर लगाई डूबकी....

कुर्सी में बाधक बने ‘पत्थर’ को हटाने के लिए हाकिमों ने भ्रष्टाचार की गंगोत्री में जमकर लगाई डूबकी....

PATNA:  बिहार के कई कप्तानों ने हाल के दिनों में बहती गंगा में जमकर डूबकी लगाई है।आखिर डूबकी लगाते भी क्यों नहीं... मुखिया ने जो ऐसा सुनहरा अवसर बैठे-बिठाए मुहैया जो करा दिया है।

दरअसल ‘राजा’ इन दिनों काफी परेशान चल रहे हैं।भरी मीटिंग में बड़े वाले हाकिम की क्लास लगाने से भी नहीं चूक रहे।फिर भी जब सिस्टम में सुधार नहीं दिखी तो पूरे तंत्र को कसने का प्लान बना लिया। ‘राजा’ का पूरा प्लान बस कुछ हीं दिनों में धरातल पर सौ फीसदी उतरने वाली है।

 सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि हमें ‘दागी’ नहीं चाहिए।सरकार ने जब से यह फरमान सुनाया है तभी से दागी-ब्लैक मार्का और जिन पर विभागीय कार्यवाही लंबित है वैसे अफसर भारी टेंशन में हैं। सेटिंग के तहत दशकों से कुर्सी हथियाए रहने और जिंदगी मौज-मस्ती में काटने वाले वैसे अफसर जो एकाध विभागीय कार्यवाही लंबित होने की वजह से कुर्सी से वंचित होने वाले थे उन्होंने एक काट खोजा...। काट यह कि किसी तरह से लंबित कार्यवाही को खत्म कराई जाए। चाहे इसके लिए जो भी कुर्बानी देनी पड़े उसे देंगे...इसके लिए साहब को सेट करने की जुगत भिडाई गई। सेटिंग में माहिर कई खिलाड़ियों ने तो साहब को सेट भी कर लिया...कईयों ने तो कप्तान साहब को सेट कर बाजी भी मार ली...और कुर्सी के बीच में बाधक बनने वाले पत्थर को सदा के लिए हटवा दिया...जो नहीं सेट कर सके या फिर पत्थरों की संख्या अधिक थी वे सड़क पर आ गए..जो औंधे मुंह गिरे उनकी सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर है कि उम्र के इतने साल मौज-मस्ती और हर दिन चांद का दीदार होने के बाद अब महीनें में सिर्फ एक बार चांद के दर्शन होंगे...

खबर पक्की है... इस सेटिंग के खेल में हाकिमों ने जमकर डूबकी लगाई है।जिनको कुर्सी प्यारी थी और बीच में एक रोड़ा बाधक बन रही थी उसे हटाने के लिए हाकिमों ने मुंहमांगा कीमत वसूल की।आखिर कुर्सी से प्यार करने वाले लोग करते भी तो क्या? एक पत्थर जो बीच में आ जा रहा था...उसे हटाने के लिए चढ़ावा तो चढ़ाना हीं था..सो किया और कुर्सी जाते-जाते बची।

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