छपरा में अब तक आधा दर्जन थानेदार-दारोगा को अपराधियों ने बनाया है अपना निशाना..पढ़ें पूरी रिपोर्ट

छपरा में अब तक आधा दर्जन थानेदार-दारोगा को अपराधियों ने बनाया है अपना निशाना..पढ़ें पूरी रिपोर्ट

PATNA:छपरा के मढ़ौरा में अपराधियों के साथ मुठभेड़ में एक बार फिर से एक सब इंस्पेक्टर  मिथिलेश कुमार साह व सिपाही फारूख शहीद हो गए।वहीं 2 अन्य सिपाही को भी गोली लगी है जिसका ईलाज जारी है।आज यह चर्चा करना जरूरी है कि इसके पहले भी छपरा में अपराधी पुलिस पर भारी पड़ते दिखे हैं।पहले भी कई थानेदारों को अपराधियों ने अपना निशाना बनाया है। आज मंगलवार को शहीद हुए सब इंस्पेक्टर अखिलेश कुमार साह मशरख और तरैया थाना के थानेदार रह चुके थे। जानकारी के अनुसार अपराधी उनसे खौफ खाते थे।

चार साल पहले इसुआपुर थानाध्यक्ष संजय तिवारी की  अपराधियों ने धोखे से हत्या कर दी थी। संजय शाम में कोरिया ढाला के पास गश्ती मे थे।तभी उनपर अपराधियों ने छल से हमला कर दिया जिससे उनकी जान चली गई।छपरा जिले में अबतक आधा दर्जन थानाध्यक्षो को अपराधियों ने अपना निशाना बनाया है। इनमें से चार थानेदार की जान चली गई जबकि एक थानाध्यक्ष बाल-बाल बच गए थे। वहीं एक थाना प्रभारी की बदमाशों ने पिस्टल लूट ली थी। 

सबसे पहले अपराधियों ने 1998 में मकेर के तत्कालीन थाना प्रभारी अनिल कुमार की  रेवाघाट में हत्या की थी। तबसे लगातार यह सिलसिला चल रहा है। इसके बाद वर्ष 2000 में गड़खा के तत्कालीन थानाध्यक्ष रामसुंदर प्रसाद की हत्या छपरा शहर के नेवाजी टोली में गोली मारकर कर दी गई थी। इस दौरान अपराधियों ने उनकी सर्विस रिवाल्वर भी लूट लिया था। मशरक के तत्कालीन थानाध्यक्ष गोपालजी मिश्र की भी हत्या डकैतों ने गोली मारकर कर दी थी। गोपालजी मिश्र को डकैती की सूचना मिली थी। इस सूचना पर वे गांव पहुंच गये थे। वहीं पर डकैतो ने उन्हें गोली मार दी। इसके बाद भेल्दी के तत्कालीन थानाध्यक्ष विनोद कुमार अपराधियों के निशाने पर आये। लेकिन वे बाल-बाल बच गए।

गड़खा के तत्कालीन थानाध्यक्ष ओम प्रकाश को भी अपराधियों ने नहीं बख्सा। बताया जाता है कि अवतारनगर थाना क्षेत्र के रामगढ़ा गांव के समीप अपराधी वाहन लूट की घटना को अंजाम दे रहे थे उसी दौरान तत्कालीन थानाध्यक्ष वहां पहुंच गये। अपराधियों ने थानाध्यक्ष को भी नहीं छोड़ा और उनकी सर्विस रिवाल्वर भी छीन ली

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