बिहार विधानसभा नियुक्ति घोटाला में फंसे सदानंद सिंह, निगरानी ने कांग्रेस नेता समेत 41 लोगों पर दाखिल किया चार्जशीट

बिहार विधानसभा नियुक्ति घोटाला में फंसे सदानंद सिंह, निगरानी ने कांग्रेस नेता समेत 41 लोगों पर दाखिल किया चार्जशीट

PATNA: बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष कांग्रेस नेता सदानंद सिंह नियुक्ति घोटाला में फंस गए हैं। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बुधवार को सदानंद सिंह समेत 41 लोगों पर चार्जशीट दाखिल कर दी है। निगरानी विशेष कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई है। मामला वर्ष 2000 से 2005 के बीच बिहार विधानसभा में हुए अवैध नियुक्तियों का है।

निगरानी ब्यूरो की चार्जशीट के अनुसार अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से रिश्तेदारों को क्लर्क के पद पर बहाल किया गया। बहाली में नियम कानून की अनदेखी की गईं और राज्यपाल के अध्यादेश की भी गलत तरीके से व्याख्या की गई। कर्मचारियों की वैकेंसी में मौखिक या साक्षात्कार लेने का कोई जिक्र नहीं था, लेकिन रिश्तेदारों को बहाल करने के लिए रिक्त पदों से कई गुना अधिक उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया।

आरोप है कि अवैध नियुक्त कर्मचारियों की उत्तर पुस्तिकाओं में भी हेराफेरी की गई।चार्जशीट के मुताबिक सदानंद सिंह ने अपने एक रिश्तेदार संजय कुमार को बहाल करने के लिए मनमाने तरीके से चयन कमेटी का गठन किया। चयन समिति में वैसे सदस्यों को रखा गया जिनके सगे-संबंधी परीक्षा में शामिल हुए थे।

निगरानी का आरोप है कि बिहार विधानसभा में बड़े पैमाने पर अधिकारियों के बेटे व रिश्‍तेदार चयनित कर लिये गए। बताया जाता है कि तत्‍कालीन उप सचिव वशिष्ठ देव तिवारी के पुत्र नवीन कुमार, आप्‍त सचिव विमल प्रसाद के पुत्र राकेश कुमार, अवर सचिव बैजू प्रसाद सिंह के पुत्र मनीष कुमार, सुबोध कुमार जायसवाल के पुत्र रतन कुमार का चयन किया गया। इसी तरह, उप सचिव पुरुषोत्तम मिश्रा के रिश्तेदार देव कुमार, उप सचिव ब्रजकिशोर सिंह के रिश्तेदार सत्यनारायण, उप सचिव अरुण कुमार के रिश्तेदार नीरज आनंद, उप सचिव ब्रजकिशोर सिंह के रिश्तेदार सत्यनारायण, उप सचिव नवलकिशोर सिंह के रिश्तेदार अवधेश कुमार सिंह, आप्त सचिव कामेश्वर प्रसाद सिंह के रिश्तेदार संजीव कुमार आदि को भी नियुक्ति के लिए चुन लिया गया था।

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